हिमाचल का चुनाव भाजपा के लिए इस बार बेहद खास : नड्डा

Edited By Updated: 17 Oct, 2022 07:33 AM

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हिमाचल प्रदेश का चुनाव भाजपा के लिए इस बार बेहद खास है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा इसी राज्य से आते हैं।

नेशनल डेस्क : हिमाचल प्रदेश का चुनाव भाजपा के लिए इस बार बेहद खास है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा इसी राज्य से आते हैं। केन्द्र सरकार में सर्वाधिक सक्रिय एवं युवा मंत्री अनुराग ठाकुर भी इसी सूबे से हैं जो मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में भी देखे जाते हैं। इसलिए भाजपा के लिए यह प्रतिष्ठा का चुनाव माना जा रहा है। नड्डा के समक्ष इसलिए भी चुनौती है कि उन पर पहले से अच्छा रिजल्ट देने का दबाव है। फिलहाल यहां जयराम ठाकुर की अगुवाई में भाजपा की सरकार है। इस राज्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी पुराना रिश्ता रहा है, यही कारण है कि वह खुद कमान संभाले हुए हैं।

पिछले 17 दिनों में तीन बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने राज्य को वीआईपी कही जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का तोहफा दिया है। इसके साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात दी। जानकारों का मानना है कि हिमाचल में भले ही भाजपा फ्रंट फुट पर खेल रही है, लेकिन रिस्क बिल्कुल भी नहीं लेना चाहेगी। शीर्ष नेतृत्व हिमाचल में टिकट बंटवारे को लेकर काफी सतर्क है। चर्चा है कि एक दर्जन सिटिंग विधायकों को अपने टिकट से हाथ धोना पड़ सकता है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की माने तो टिकट बंटवारे में ‘काम नहीं, टिकट नहीं’ का फॉर्मूला अपनाने पर मंथन चल रहा है। जिन विधायकों के क्षेत्रों में जनता का अच्छा रिस्पॉन्स नहीं है उन्हें फिर टिकट दिया जाएगा, इसकी बेहद कम संभावना है। वैसे तो भाजपा दो माह पहले ही संगठनात्मक रूप से तैयारियां शुरू कर चुकी है। अगस्त महीने में सौदान सिंह को राज्य में चुनाव प्रभारी और देविंदर राणा को सह-प्रभारी नियुक्त किया जा चुका है। दोनों को विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में फीडबैक का जिम्मा सौंपा गया था, जो टिकट बंटवारे के वक्त फैसले में काम आएगा।

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 68 सीटों में से 44 पर जीत हासिल की थी। बाद में कांग्रेस के दो विधायक भी भाजपा में शामिल हो गए। लेकिन, पिछले साल चार सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के हाथों भाजपा की करारी हो गई थी। यहां तक कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह क्षेत्र में भी हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि भाजपा ने तर्क दिया कि कांग्रेस को पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की मौत के बाद सिम्पैथी वोट मिले हैं।

इस बार मुकाबला त्रिकोणीय

हिमाचल में अब तक मुख्य चुनावी दंगल भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होता आया है, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी की मौजूदगी ने मुकाबला दिलचस्प बना दिया है। मुफ्त रेवड़ी वाली संस्कृति से आम आदमी पार्टी हिमाचल के लोगों को भी लुभाने की कोशिश कर रही है। उसके हौसलें भी बुलंद है, इसलिए देखना होगा हिमाचल की जनता इस पार्टी को कितना आशीर्वाद देती है।

उत्तराखंड दोहराने की तैयारी : हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो यहां जनता एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका देती रही है। इस परम्परा पर विश्वास किया जाए तो इस बार कांग्रेस की बारी है। लेकिन ऐसी परम्पराएं और राजनीतिक इतिहास बदलते हुए भी देखे गए हैं, इसीलिए नया इतिहास लिखने वाली भाजपा ने सत्ता में लौटने के लिए पूरी जान लगा रखी है। भाजपा का दावा है कि वह उत्तराखण्ड की तरह ही हिमाचल में भी नया चुनावी इतिहास लिखेगी।

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