Edited By Mehak,Updated: 05 Jan, 2026 01:38 PM

भारतीय रेलवे का सर्कुलर जर्नी टिकट यात्रियों के लिए एक बेहद सुविधाजनक विकल्प है। इसके तहत एक ही स्टेशन से यात्रा शुरू करके तय रूट पर 8 अलग-अलग स्टेशनों तक सफर किया जा सकता है और अंत में वही स्टेशन लौट आएं। इसकी वैधता 56 दिन तक होती है। टिकट...
नेशनल डेस्क : देश में हर दिन करोड़ों लोग ट्रेन से यात्रा करते हैं, लेकिन भारतीय रेलवे की कुछ सुविधाओं के बारे में ज्यादातर यात्रियों को जानकारी नहीं होती। ऐसी ही एक खास सुविधा है सर्कुलर जर्नी टिकट, जो खासतौर पर घूमने-फिरने और तीर्थ यात्रा पर जाने वालों के लिए बहुत फायदेमंद है। हालांकि, इसके बारे में कम लोग जानते हैं।
क्या है सर्कुलर जर्नी टिकट?
भारतीय रेलवे के अनुसार, सर्कुलर जर्नी टिकट उन यात्राओं के लिए जारी किया जाता है, जिसकी शुरुआत और समाप्ति एक ही स्टेशन पर होती है। इस टिकट के जरिए यात्री एक तय रूट पर कई शहरों और स्टेशनों से होकर यात्रा कर सकता है और अंत में वही स्टेशन लौट आता है, जहां से यात्रा शुरू हुई थी। सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही टिकट से 8 अलग-अलग स्टेशन तक यात्रा की जा सकती है। इस दौरान यात्री अलग-अलग ट्रेनों में सफर करने की सुविधा भी प्राप्त करता है। इसलिए यह टिकट तीर्थ यात्रियों और टूर प्लान करने वालों के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है।
वैधता और किराया
रेलवे नियमों के अनुसार, सर्कुलर जर्नी टिकट की वैधता 56 दिनों तक होती है। इसका मतलब है कि यात्री अपने टूर प्लान के अनुसार रुक-रुक कर सफर कर सकता है और बार-बार नए टिकट बुक कराने की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही, इस टिकट पर टेलिस्कोपिक दरें लागू होती हैं। इसका मतलब यह है कि जितने ज्यादा स्टेशन यात्रा में शामिल होंगे, उतना ही प्रति स्टेशन किराया कम पड़ता है। इसलिए यह टिकट अलग-अलग टिकट लेने की तुलना में काफी सस्ता साबित होता है।
कौन ले सकता है यह टिकट?
सर्कुलर जर्नी टिकट सभी कैटेगरी की ट्रेनों में उपलब्ध है, चाहे वह स्लीपर, एसी या फर्स्ट क्लास हो। यह व्यक्तिगत यात्रियों के साथ-साथ ग्रुप में यात्रा करने वालों के लिए भी जारी किया जा सकता है। इसके अलावा, अगर इस टिकट के तहत न्यूनतम 1000 किलोमीटर की यात्रा की जाती है, तो वरिष्ठ नागरिकों को किराए में छूट का लाभ भी मिलता है।
कैसे बुक करें सर्कुलर जर्नी टिकट?
यह टिकट सीधे टिकट काउंटर से नहीं मिलता। इसके लिए यात्रियों को पहले अपनी यात्रा रूट की जानकारी रेलवे अधिकारियों को देनी होती है। रूट फाइनल होने के बाद टिकट की गणना की जाती है और फिर संबंधित स्टेशन से टिकट लिया जा सकता है। इसके बाद अलग-अलग चरणों के लिए सीट रिजर्वेशन कराई जाती है।