Edited By Mehak,Updated: 07 Jan, 2026 03:26 PM

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर लक्ज़मबर्ग दौरे पर हैं, जहां उन्होंने दोनों देशों के मजबूत और पुराने संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने फिनटेक, स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, निवेश और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही। भारत और...
नेशनल डेस्क : विदेश मंत्री एस. जयशंकर यूरोपीय देश लक्जमबर्ग के दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि भारत लक्जमबर्ग को एक 'बहुत अहम पार्टनर' मानता है और दोनों देश फिनटेक, स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं। जयशंकर ने लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री ल्यूक फ्राइडन के साथ फाइनेंस, इन्वेस्टमेंट और टेक सेक्टर में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इसके अलावा उन्होंने उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर पर वार्ता की।
लंबे समय से मजबूत साझेदारी
भारत और लक्जमबर्ग लंबे समय से करीबी सहयोगी रहे हैं। दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक संबंध 1948 में शुरू हुए। आर्थिक और व्यापारिक संबंध वर्षों से मजबूत रहे हैं। हाई-लेवल मुलाकातों और वार्ताओं के जरिए दोनों देशों ने अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग को और मजबूती दी है।
170 से ज्यादा भारतीय कंपनियां लिस्टेड
लक्जमबर्ग, जिसकी आबादी केवल 6 लाख है, वहां कई कंपनियां दो दशकों से अधिक समय से मेक इन इंडिया पहल में सक्रिय हैं और भारतीय बाजार में काम कर रही हैं। लक्जमबर्ग के NGOs भारत में हेल्थ, एजुकेशन और सोशल वर्क के क्षेत्र में स्थानीय पार्टनर्स के साथ सहयोग करते हैं। इसके अलावा, लक्जमबर्ग हर साल भारत में कई फिल्म फेस्टिवल्स में भाग लेता है, जहां देश की फिल्म प्रोडक्शन या को-प्रोडक्शन दिखाई जाती हैं।
लक्जमबर्ग ने 2002 में नई दिल्ली में अपना दूतावास खोला। वर्तमान में लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज में 170 से अधिक भारतीय कंपनियां लिस्टेड हैं। 1983 में ग्रैंड ड्यूक जीन भारत आने वाले लक्जमबर्ग के पहले राष्ट्राध्यक्ष बने थे, और तब से कई व्यापार और विदेश मामलों के मंत्री भारत का दौरा कर चुके हैं।