ईरानी नेता की खुली धमकीः कुचल कर दिखाएंगे अमेरिका-इजरायल, सुप्रीमो की मौत “राष्ट्र के दिल पर वार"

Edited By Updated: 01 Mar, 2026 02:57 PM

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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित अमेरिकी-इजरायली हमले में मौत के बाद देश में उथल-पुथल मच गई है। वरिष्ठ नेता अली लारीजानी ने “कुचल देने वाली प्रतिक्रिया” की चेतावनी दी है। 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है और अंतरिम नेतृत्व...

International Desk: ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की अमेरिकी-इजरायली हमले में मौत के बाद देश में भारी तनाव है। ईरानी मीडिया ने उनकी मौत को “शहादत” बताया है।  वरिष्ठ ईरानी नेता अली लारीजानी (Ali Larijani) ने अमेरिका और इजरायल को सीधी चेतावनी देते हुए कहा-“उन्होंने राष्ट्र के दिल पर वार किया है, अब उनका दिल भी चीर दिया जाएगा। जवाब पहले से कहीं ज्यादा कुचल देने वाला होगा।” ईरानी समाचार एजेंसी Tasnim News Agency के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत अंतरिम नेतृत्व परिषद बनाई जा रही है। इस परिषद में राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख, संवैधानिक परिषद का एक न्यायविद सदस्य  शामिल होंगेजब तक नए नेता का चुनाव नहीं हो जाता,  यह परिषद तब तक सर्वोच्च नेता के कर्तव्यों को निभाएगी ।

 

अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सशस्त्र बलों ने इजरायली कब्जे वाले क्षेत्रों और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं।यह घटनाक्रम पूरे मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध का खतरा बढ़ा सकता है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters के अनुसार, ईरान में 40 दिनों का सार्वजनिक शोक घोषित किया गया है। राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके हैं। बड़े पैमाने पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं। राजधानी Tehran सहित प्रमुख शहरों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सरकारी मीडिया उनकी मृत्यु को “राष्ट्र की संप्रभुता के लिए अंतिम बलिदान” बता रहा है।

 

अगला नेता कौन?
अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। उन्होंने इमाम खुमैनी के निधन के बाद पद संभाला था।अब उनकी मौत के साथ इस्लामी गणराज्य के इतिहास का एक 37 साल लंबा अध्याय समाप्त हो गया है। अब सबसे बड़ा सवाल है क्या सत्ता धार्मिक नेताओं (क्लेरिक्स) के पास जाएगी या फिर शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड ज्यादा प्रभाव जमाएगा?युद्ध जैसे हालात में उत्तराधिकारी चुनना आसान नहीं होगा। यह फैसला ईरान की भविष्य की दिशा तय करेगा । 

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