Edited By Tanuja,Updated: 08 Jun, 2026 06:43 PM

अमेरिका के टेक्सास में भारतीय मूल की रश्मि भट्ट ने खुलासा किया कि वह अपने भारतीय रेस्तरां में कर्मचारियों की भर्ती जातीयता के आधार पर नहीं करतीं। उनका कहना है कि उनकी प्राथमिकता मेहनती और भरोसेमंद टीम बनाना है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस...
International Desk: अमेरिका के टेक्सास में भारतीय मूल की एक रेस्तरां मालिक रश्मि भट्ट का बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। भारतीय और मेडिटेरेनियन भोजन परोसने वाले रेस्तरां की मालिक ने एक वीडियो में कहा कि वह अपने रेस्तरां में कर्मचारियों की भर्ती भारतीय होने के आधार पर नहीं करतीं।उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
कौन हैं रश्मि भट्ट?
Rashmi Bhat टेक्सास के New Braunfels में स्थित 7 Monk's Cafe की सह-संस्थापक हैं। उन्होंने अपनी मां के साथ मिलकर 2019 में यह रेस्तरां शुरू किया था। कोविड-19 महामारी के कठिन दौर के बावजूद उनका व्यवसाय टिक पाया और धीरे-धीरे स्थानीय लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में रश्मि ने कहा, "मैं अपने भारतीय रेस्तरां में भारतीयों को नौकरी नहीं देती।" हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय भारतीयों को बाहर रखना नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को जातीय पहचान से अलग रखना है। रश्मि के अनुसार, जब लोग किसी भारतीय रेस्तरां में आते हैं तो अक्सर यह मान लेते हैं कि वहां काम करने वाले सभी लोग भारतीय ही होंगे। लेकिन उन्होंने और उनकी मां ने शुरुआत से ही अलग सोच अपनाई। रश्मि का कहना है कि उन्होंने कभी "भारतीय टीम" बनाने का लक्ष्य नहीं रखा। उनके मुताबिक, "हमने एक बेहतरीन टीम बनाने का लक्ष्य रखा, न कि किसी विशेष जातीय समूह की टीम।"
उन्होंने बताया कि उनके यहां हाई स्कूल और कॉलेज के छात्र, सिंगल मदर्स, स्थानीय निवासी और सेवानिवृत्त लोग भी काम करते हैं। उनका मानना है कि कर्मचारियों का चयन उनकी मेहनत, भरोसेमंदी और सीखने की इच्छा के आधार पर होना चाहिए, न कि उनकी नस्ल, रंग या राष्ट्रीयता के आधार पर। रश्मि ने कहा कि उनके कुछ कर्मचारी ऐसे थे जिन्होंने नौकरी शुरू करने से पहले कभी भारतीय भोजन तक नहीं चखा था। लेकिन प्रशिक्षण और अनुभव के बाद आज वे ग्राहकों को भारतीय व्यंजनों के बारे में विस्तार से बता सकते हैं और अपनी पसंदीदा डिश की सिफारिश भी करते हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या भारतीय भोजन की असली पहचान और स्वाद को बनाए रखने के लिए भारतीय रसोइयों की जरूरत नहीं होती।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
- रश्मि के वीडियो को कुछ ही घंटों में लाखों बार देखा गया और कमेंट सेक्शन में बहस शुरू हो गई।
- कुछ यूजर्स ने उनकी भर्ती नीति की सराहना की और कहा कि नौकरी देने में योग्यता सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
- वहीं कई लोगों ने असहमति जताई।
- एक यूजर ने लिखा, "आपकी भर्ती नीति अच्छी हो सकती है, लेकिन मैं प्रामाणिक भारतीय भोजन के लिए भारतीय शेफ को प्राथमिकता दूंगा।"
- दूसरे ने कहा,"अगर भारतीय खाना भारतीय व्यक्ति नहीं बना रहा है, तो मैं वहां खाना नहीं खाऊंगा।"
- कुछ लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि गैर-भारतीय कर्मचारियों को कई बार भारतीय व्यंजनों और उनके नामों की पर्याप्त जानकारी नहीं होती।
बहस का बड़ा सवाल
यह विवाद केवल एक रेस्तरां तक सीमित नहीं है। इससे एक बड़ा सवाल भी सामने आया है कि क्या किसी विशेष संस्कृति का भोजन परोसने के लिए उसी संस्कृति के लोगों का होना जरूरी है, या फिर प्रशिक्षण, कौशल और गुणवत्ता अधिक महत्वपूर्ण हैं? रश्मि भट्ट का कहना है कि उनके लिए विविधता, अवसर और टीम की क्षमता सबसे अहम है, जबकि आलोचकों का मानना है कि प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए सांस्कृतिक जुड़ाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।