Edited By Anu Malhotra,Updated: 05 Sep, 2026 02:45 PM

देशभर के थर्मल पावर प्लांट में कोयले की किल्लत को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के हालिया डेटा के मुताबिक, देश भर के थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक तय लेवल के आधे से भी कम हो गया है। 2 सितंबर तक, बिजली...
नई दिल्ली: देशभर के थर्मल पावर प्लांट में कोयले की किल्लत को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के हालिया डेटा के मुताबिक, देश भर के थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक तय लेवल के आधे से भी कम हो गया है। 2 सितंबर तक, बिजली की ज़्यादा मांग और मॉनसून की वजह से सप्लाई में रुकावट के कारण 50 प्लांट में कोयले का स्टॉक 'बहुत कम' (critically low) पाया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 224 गीगावाट (GW) की कुल क्षमता वाले इन बिजली संयंत्रों के पास बुधवार तक केवल 28.2 मिलियन टन (MT) कोयला बचा था, जबकि नियमानुसार यहां 58.7 मिलियन टन का स्टॉक होना अनिवार्य है। उपलब्ध स्टॉक 85% प्लांट लोड फैक्टर पर लगभग 9 दिन की कोयले की ज़रूरत के बराबर है, जबकि सामान्य तौर पर यह लगभग 19 दिन की ज़रूरत के बराबर होना चाहिए। जिन 50 प्लांट को क्रिटिकल घोषित किया गया है, वहां उनके तय स्टॉक का 25 प्रतिशत से भी कम कोयला बचा है।
ईरान युद्ध के कारण सप्लाई में आई दिक्कतों के बीच भारत एनर्जी इम्पोर्ट के विकल्प के तौर पर कोयला गैसीफिकेशन पर विचार कर रहा है। हालांकि, कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि सभी क्रिटिकल प्लांट पर अधिकारियों की एक अंतर-मंत्रालयी टीम रोज़ाना नज़र रख रही है और उन्हें लगातार ईंधन की सप्लाई की जा रही है।
50 में से 45 प्लांट घरेलू ईंधन पर आधारित हैं, चार इम्पोर्टेड कोयले के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और एक वॉशरी रिजेक्ट्स पर चलता है। कोयला मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "CEA के नियमों के तहत किसी थर्मल पावर प्लांट को 'क्रिटिकल' की श्रेणी में रखना निगरानी का एक सामान्य तरीका है। इसका मतलब बस यह है कि उन पर ज़्यादा बारीकी से नज़र रखी जाएगी और प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। ऐसा नहीं है कि इन प्लांट में सप्लाई खत्म हो रही है।"