Edited By Radhika,Updated: 10 Mar, 2026 02:20 PM

Global Energy Map पर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' महज एक संकरा समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि आधुनिक दुनिया की धड़कन है। 8 अरब की वैश्विक आबादी को गतिमान रखने के लिए प्रतिदिन करीब 26 अरब पाउंड जीवाश्म ईंधन जमीन से निकाला जाता है। वहीं भारत अपने कच्चे तेल की कुल...
Strait Of Hormuz : Global Energy Map पर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' महज एक संकरा समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि आधुनिक दुनिया की धड़कन है। 8 अरब की वैश्विक आबादी को गतिमान रखने के लिए प्रतिदिन करीब 26 अरब पाउंड जीवाश्म ईंधन जमीन से निकाला जाता है। वहीं भारत अपने कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का लगभग 85% विदेशों से खरीदता है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस आयात का 40 से 60 % हिस्सा अकेले इसी मार्ग से होकर भारतीय बंदरगाहों तक पहुँचता है। इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे प्रमुख निर्यातक इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। अगर युद्ध के चलते इस रास्ते को बंद किया जाता है तो भारत के पास मौजूद रणनीतिक तेल भंडार केवल कुछ सप्ताह ही साथ दे पाएंगे। इसके बाद परिवहन ठप होने और माल ढुलाई महंगी होने से देश में महंगाई का बेकाबू होना तय है।
रसोई से लेकर खेतों तक मचेगा हाहाकार
यह संकट केवल पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं रहेगा। भारत अपनी LPG खपत का 80 से 85 % हिस्सा और औद्योगिक बिजली घरों के लिए जरूरी LNG का 50 से 60 % हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए मंगाता है। गैस की कमी न केवल घरेलू रसोई का बजट बिगाड़ेगी, बल्कि औद्योगिक उत्पादन को भी भारी चोट पहुँचाएगी। कृषि प्रधान भारत के लिए स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। हमारी कुल उर्वरक (खाद) आपूर्ति का 30% हिस्सा इसी रास्ते से आता है। आपूर्ति में देरी का सीधा असर बुवाई के सीजन और फसल की पैदावार पर पड़ेगा, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

निर्माण और हीरा उद्योग पर ताला लगने का डर
इमारतों के निर्माण के लिए आवश्यक चूना पत्थर और भारत के विश्व प्रसिद्ध हीरा उद्योग के लिए जरूरी 'रफ डायमंड्स' भी इसी मार्ग से यूएई और इजरायल से आते हैं। मार्ग बंद होने की स्थिति में सूरत और मुंबई के हीरा बाजारों में काम बंद हो सकता है, जिससे लाखों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा। इसके अलावा प्लास्टिक, पेंट और सिंथेटिक कपड़ों के निर्माण में काम आने वाले पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स की कमी से पूरा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर गड़बड़ा सकता है।

क्या है भारत के पास विकल्प?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का कोई तत्काल और पूर्ण विकल्प मौजूद नहीं है। यदि भारत अफ्रीका या अमेरिका जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से आयात बढ़ाता है, तो लॉजिस्टिक लागत बढ़ने से चीजें काफी महंगी हो जाएंगी। इस मार्ग में एक महीने का भी अवरोध भारतीय बाजार में आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत और कीमतों में ऐतिहासिक उछाल ला सकता है।