Edited By Tanuja,Updated: 23 May, 2026 09:02 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच नई दिल्ली में अहम बैठक हुई। दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक तकनीक और QUAD सहयोग पर चर्चा की। पश्चिम एशिया संकट पर भी बातचीत हुई, जहां भारत ने शांति और...
International Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ नई दिल्ली में व्यापक बातचीत की। इस दौरान रक्षा, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, रणनीतिक तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के मुताबिक, मार्को रूबियो ने भारत-अमेरिका सहयोग में लगातार हो रही प्रगति की जानकारी दी। बातचीत में रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, कनेक्टिविटी, शिक्षा, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषय शामिल रहे।
बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। रूबियो ने अमेरिका का दृष्टिकोण भारत के सामने रखा। इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हमेशा शांति, संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान का समर्थन करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत और अमेरिका वैश्विक हितों के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति पर खुशी जताई।नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास सपोर्ट एनेक्स बिल्डिंग का उद्घाटन करते हुए रूबियो ने भारत को अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का बेहद महत्वपूर्ण साझेदार बताया। रूबियो ने कहा कि इस नई इमारत का उद्घाटन भारत में करना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि यह अमेरिका की उस सोच का प्रतीक है जिसमें भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में केंद्रीय भूमिका दी गई है।
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्तों की सबसे मजबूत नींव राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदीके बीच व्यक्तिगत संबंध हैं। रूबियो ने कहा कि दोनों नेताओं का रिश्ता ट्रंप के पहले कार्यकाल से शुरू हुआ था, जब उन्होंने भारत का दौरा किया था, और अब दूसरे कार्यकाल में भी यह संबंध और मजबूत हुआ है।रूबियो ने कहा कि नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत जुड़ाव बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इससे रणनीतिक साझेदारी को स्थिरता और भरोसा मिलता है। उन्होंने मोदी और ट्रंप को “गंभीर और दूरदर्शी नेता” बताते हुए कहा कि दोनों सिर्फ अल्पकालिक राजनीति नहीं, बल्कि लंबे समय के वैश्विक हितों पर ध्यान दे रहे हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत-अमेरिका सहयोग आने वाले वर्षों में और ज्यादा अहम होने वाला है। बैठक में विदेश मंत्री S. Jaishankar, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval, भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor और अमेरिकी अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।सर्जियो गोर ने इस बैठक को “प्रोडक्टिव” बताया और कहा कि दोनों देशों ने सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने भारत को अमेरिका का “महत्वपूर्ण साझेदार” भी बताया।