Edited By Mehak,Updated: 15 Jan, 2026 01:36 PM

भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमान की कमी जल्द पूरी होने वाली है। सरकार फ्रांस से 114 राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी देने की तैयारी में है। इसमें 80% विमान भारत में बनाए जाएंगे और कुछ सीधे उड़ान योग्य हालत में आएंगे। राफेल की सर्विसेबिलिटी एफ-35 से...
नेशनल डेस्क : भारतीय वायुसेना लंबे समय से लड़ाकू विमानों की कमी का सामना कर रही है, लेकिन यह परेशानी अब जल्द दूर हो सकती है। केंद्र सरकार फ्रांस से 114 अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी देने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय की स्वीकृति के बाद इसे केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। अगर अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारत के सैन्य इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील मानी जाएगी।
डील की लागत और निर्माण योजना
इस संभावित सौदे की कुल लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना के तहत 114 में से लगभग 80 प्रतिशत विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। शुरुआती चरण में 12 से 18 विमान सीधे उड़ान योग्य हालत में भारत लाए जाएंगे, जबकि बाकी विमानों को देश में तैयार करने की योजना है।
भारत में आएंगी दसॉल्ट की सुविधाएं
राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी कुछ उत्पादन और तकनीकी सुविधाएं भारत में स्थापित कर सकती है। फिलहाल भारत और फ्रांस के अधिकारियों के बीच विमानों की कीमत और अन्य शर्तों को लेकर बातचीत चल रही है। माना जा रहा है कि यह सौदा 2016 में हुई राफेल डील की कीमत के आधार पर होगा, जिसमें हर साल करीब चार प्रतिशत महंगाई दर जोड़ी जा सकती है। इससे कुल लागत में बढ़ोतरी संभव है।
मेंटेनेंस और सर्विस में बड़ी बढ़त
इस डील के तहत भारत में राफेल विमानों के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) की सुविधा भी स्थापित की जाएगी। इससे विमानों की उपलब्धता और भरोसेमंद संचालन क्षमता काफी बेहतर होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राफेल की सर्विसेबिलिटी करीब 90 प्रतिशत मानी जाती है, जो इसे बेहद विश्वसनीय बनाती है। इसी वजह से भारत ने इसे अन्य विकल्पों की तुलना में ज्यादा उपयुक्त माना है।
युद्ध में परखा हुआ विमान
राफेल लड़ाकू विमान को कई युद्ध अभियानों में इस्तेमाल किया जा चुका है। कंपनी का दावा है कि करीब 15 साल की सेवा के दौरान अब तक किसी भी देश में राफेल को न तो मार गिराया गया है और न ही यह किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार हुआ है। इसी भरोसेमंद रिकॉर्ड के चलते इसे दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमानों में गिना जाता है।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का फोकस इस डील के जरिए ज्यादा से ज्यादा कल-पुर्जों का निर्माण भारत में कराने पर है। इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती मिलेगी और देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। भविष्य में भारत में बने राफेल विमानों और उनके पुर्जों के निर्यात की संभावना भी जताई जा रही है।
पहले से मौजूद राफेल बेड़ा
फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल लड़ाकू विमान पहले से सेवा में हैं। इसके अलावा नौसेना के लिए 26 मरीन राफेल विमानों की खरीद का सौदा भी हो चुका है। मौजूदा हालात में वायुसेना की जरूरतों को देखते हुए राफेल को सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है, जिस पर पिछले कई वर्षों से चर्चा चल रही है।