भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर के पार, RBI के आंकड़ों में बड़ी बढ़त

Edited By Updated: 23 Jan, 2026 09:56 PM

indicator for the economy

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर मजबूत उछाल दर्ज किया गया है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 16 जनवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर...

नेशनल डेस्क: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर मजबूत उछाल दर्ज किया गया है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 16 जनवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 701.36 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले सप्ताह की तुलना में 14.17 अरब डॉलर की बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले 9 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 687.19 अरब डॉलर था।

अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फॉरेक्स रिजर्व में यह बढ़त न सिर्फ रुपये को मजबूती देती है, बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की बाहरी स्थिति को भी सुरक्षित बनाती है।

विदेशी मुद्रा संपत्तियों में सबसे ज्यादा उछाल

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्तियों यानी FCA का होता है। इस सप्ताह FCA बढ़कर 560.52 अरब डॉलर हो गया, जो एक ही हफ्ते में 9.65 अरब डॉलर की वृद्धि को दर्शाता है। FCA में अमेरिकी डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राओं में रखी गई संपत्तियां भी शामिल होती हैं, जिनकी कीमतों में बदलाव का असर कुल रिजर्व पर पड़ता है।

सोने के भंडार को भी लगातार मजबूत कर रहा भारत

इस अवधि में भारत के गोल्ड रिजर्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। सोने का भंडार 4.62 अरब डॉलर बढ़कर 117.45 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत अपने रिजर्व पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाकर जोखिम को संतुलित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

हालांकि, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 18.704 अरब डॉलर रह गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत की रिजर्व पोजिशन भी थोड़ी कम होकर 4.684 अरब डॉलर पर आ गई।

रुपये की स्थिरता पर RBI की नजर

RBI ने दोहराया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार की लगातार निगरानी करता है और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करता है, ताकि रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव न हो। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य किसी तय स्तर पर रुपये को बांधना नहीं, बल्कि बाजार में संतुलन बनाए रखना है।

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