Edited By Pardeep,Updated: 14 Feb, 2026 11:41 PM

सदर्न कमांड, पुणे में दो दिवसीय ‘जय से विजय सेमिनार 2026’ का समापन हुआ। प्रधानमंत्री के ‘JAI मंत्र’ — Jointness, Aatmanirbharta और Innovation — से प्रेरित इस सेमिनार में भविष्य की चुनौतियों के लिए टेक्नोलॉजी-सक्षम, इंटीग्रेटेड और फ्यूचर-रेडी सशस्त्र...
पुणे: सदर्न कमांड, पुणे में दो दिवसीय ‘जय से विजय सेमिनार 2026’ का समापन हुआ। प्रधानमंत्री के ‘JAI मंत्र’ — Jointness, Aatmanirbharta और Innovation — से प्रेरित इस सेमिनार में भविष्य की चुनौतियों के लिए टेक्नोलॉजी-सक्षम, इंटीग्रेटेड और फ्यूचर-रेडी सशस्त्र बलों के निर्माण पर फोकस रहा।
यह सेमिनार एक प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें सीनियर मिलिट्री लीडरशिप, वेटरन्स, साइंटिस्ट्स, इंडस्ट्री लीडर्स, स्टार्ट-अप्स और एकेडमिक एक्सपर्ट्स शामिल हुए। मकसद था मल्टी-डोमेन रेडीनेस और ‘विकसित भारत’ के विज़न के अनुरूप एक मजबूत सिक्योरिटी फ्रेमवर्क तैयार करना।
उद्घाटन संबोधन में सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, PVSM, UYSM, AVSM ने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और ऐसे में ऑपरेशनल एडवांटेज बनाए रखने के लिए इंटीग्रेटेड, इनोवेशन-ड्रिवन और सेल्फ-रिलायंट फोर्सेज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ‘JAI’ केवल एक कॉन्सेप्ट नहीं, बल्कि सफलता का रास्ता है — “जय से विजय”। उनके मुताबिक Jointness, Aatmanirbharta और Innovation यह तय करेंगे कि भारत अपने सशस्त्र बलों को कैसे ट्रेन, इक्विप और डिप्लॉय करता है, ताकि वर्तमान और भविष्य दोनों तरह की चुनौतियों का सामना किया जा सके।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, PVSM, UYSM, AVSM, SM, VSM ने अपने कीनोट एड्रेस में कहा कि ‘JAI’ के तीनों पिलर्स ही ‘विजय’ की दिशा तय करते हैं। उन्होंने टेक्नोलॉजी एब्जॉर्प्शन और इंस्टीट्यूशनल ट्रांसफॉर्मेशन को भविष्य की सैन्य तैयारी के लिए क्रिटिकल बताया।
सेमिनार में तीन थीमैटिक सेशंस आयोजित किए गए। पहले सत्र “आत्मशक्ति: Joint Synergy for Combat Strength and Self-Reliance” में जॉइंट ऑपरेशनल इंटीग्रेशन, कैपेबिलिटी कन्वर्जेंस और इनोवेशन-ड्रिवन कॉम्बैट स्ट्रेंथ पर चर्चा हुई। मॉडरेशन लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया (सेवानिवृत्त) ने किया। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि तीनों सेनाओं के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन और तेज क्रॉस-डोमेन इंटीग्रेशन जरूरी है, ताकि निर्णायक और समन्वित ऑपरेशनल रिजल्ट हासिल किए जा सकें।
दूसरे सत्र “Aatmanirbharta: Building Defence Capability through Indigenous Ecosystems” में स्वदेशी डिजाइन, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने पर फोकस रहा। लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बक्शी (सेवानिवृत्त) के मॉडरेशन में हुई चर्चा में आर्म्ड फोर्सेज, DRDO, इंडस्ट्री और स्टार्ट-अप्स के बीच गहरे सहयोग, मजबूत सप्लाई चेन और स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी पर जोर दिया गया।
अंतिम सत्र “Military–Civil Fusion” में मिलिट्री और सिविल सेक्टर के बीच पार्टनरशिप को फोर्स मल्टीप्लायर बताया गया। लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (सेवानिवृत्त) ने इस सत्र का संचालन किया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार, इंडस्ट्री, एकेडेमिया और टेक सेक्टर के बीच Whole-of-Nation अप्रोच अपनाकर डिफेंस इनोवेशन और मल्टी-डोमेन रेडीनेस को तेज किया जा सकता है।
सेमिनार में डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स, इंडस्ट्री स्टालवर्ट्स, स्टार्ट-अप्स, इनोवेटर्स और पॉलिसी एक्सपर्ट्स की व्यापक भागीदारी रही। सेशंस इंटरैक्टिव रहे और प्रैक्टिकल, एक्शन-ओरिएंटेड सुझाव सामने आए। आयोजकों के अनुसार, सेमिनार ने ‘JAI’ को फोर्स ट्रांसफॉर्मेशन फ्रेमवर्क के रूप में साझा समझ विकसित की और जॉइंट स्ट्रक्चर को मजबूत करने, इंडिजिनस कैपेबिलिटी बढ़ाने, इनोवेशन अडॉप्शन तेज करने और मिलिट्री–सिविल फ्यूजन को गहरा करने के लिए ठोस सिफारिशें सामने आईं।
सदर्न कमांड ने दोहराया कि प्रोफेशनल मिलिट्री डायलॉग और इंटीग्रेटेड कैपेबिलिटी डेवलपमेंट को आगे भी प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि भारत की सशस्त्र सेनाएं उभरती मल्टी-डोमेन सिक्योरिटी चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार और सक्षम रहें।