‘20 हजार की टिकट छोड़ 50 लाख के प्राइवेट जेट में घूम रहें मान सरकार के खास’ : RP Singh

Edited By Updated: 25 Mar, 2026 05:16 PM

kejriwal is travelling in a private jet worth rs 50 lakh rp singh

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। सिंह ने कहा कि  पंजाब, जो कभी अपनी खुशहाली के लिए जाना जाता था, आज 5 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम कर्ज के नीचे दबा हुआ है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि आर्थिक तंगी से जूझ...

नेशलल डेस्क: BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। सिंह ने कहा कि पंजाब, जो कभी अपनी खुशहाली के लिए जाना जाता था, आज 5 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम कर्ज के नीचे दबा हुआ है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस राज्य के खजाने का इस्तेमाल सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के लिए 'प्राइवेट जेट सर्विस' के तौर पर किया जा रहा है। विपक्ष और नागरिक समाज अब इसे भारत का सबसे महंगा "उबेर" (Uber) करार दे रहे हैं।

लाखों का खर्च और उड़ते हुए वादे

आंकड़ों के मुताबिक, पार्टी नेताओं को गुजरात और गोवा जैसे राज्यों के दौरों पर ले जाने के लिए प्रति ट्रिप लगभग 50,00,000 (50 लाख) रुपये खर्च किए जा रहे हैं। विडंबना यह है कि जिस पार्टी ने VIP कल्चर खत्म करने और सादगी के नाम पर चुनाव जीता था, उसके लिए अब 20,000 रुपये की कमर्शियल फ्लाइट 'बेसिक' लगने लगी है। CM भगवंत मान पर आरोप लग रहे हैं कि वे राज्य के कर्ज प्रबंधन से ज्यादा दिल्ली और अन्य राज्यों के लिए लॉजिस्टिक मैनेजर की भूमिका निभा रहे हैं।

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भ्रष्टाचार और नैतिकता का संकट

केवल आर्थिक फिजूलखर्ची ही नहीं, सरकार की भूमिका पर भी गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं। हाल ही में कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर का इस्तीफा, जो एक आत्महत्या के मामले में आरोपों के घेरे में आए थे, सरकार की "जीरो टॉलरेंस" नीति पर बड़ा धक्का है। कई विधायकों की गिरफ्तारी और अवैध टेंडरों में अधिकारियों पर दबाव डालने के आरोपों ने "बदलाव" के दावों की हवा निकाल दी है।

जनता की जेब पर भारी बदलाव

एक तरफ प्रशासन कर्ज चुकाने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ शाही दौरों ने जनता के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है। पंजाब के करदाता पूछ रहे हैं कि क्या उनकी मेहनत की कमाई का उद्देश्य नेताओं के राजनीतिक दौरों को 'लक्जरी' बनाना है? राजनीति के जानकारों का मानना है कि जवाबदेही की कमी और बढ़ते घोटालों के बीच पंजाब में जिस 'बदलाव' की उम्मीद की गई थी, वह अब 'विशिष्टता' (Exclusivity) की ओर मुड़ती दिख रही है।

 

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