Edited By Radhika,Updated: 10 Mar, 2026 03:07 PM

Mid-East में छिड़े सैन्य संघर्ष ने क्षेत्रीय विवाद से बढ़कर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की जड़ें हिला दी हैं। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में 25% का जोरदार उछाल आया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि एशिया से लेकर यूरोप और अमेरिका तक,...
नेशनल डेस्क: Mid-East में छिड़े सैन्य संघर्ष ने क्षेत्रीय विवाद से बढ़कर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की जड़ें हिला दी हैं। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में 25% का जोरदार उछाल आया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि एशिया से लेकर यूरोप और अमेरिका तक, विकसित और विकासशील देश ईंधन बचाने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाने को मजबूर हैं।
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पाकिस्तान और बांग्लादेश में हाल हुए बेहाल
भारत के पड़ोसी देशों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में 55 रुपये (PKR) की रिकॉर्ड वृद्धि के बाद सरकार ने स्कूल दो हफ्तों के लिए बंद कर दिए हैं और सरकारी दफ्तरों को केवल 4 दिन खोलने का आदेश दिया है। वहीं, बांग्लादेश में ईंधन की 'राशनिंग' शुरू हो गई है; यहाँ बाइक सवारों के लिए रोजाना केवल 2 लीटर पेट्रोल की सीमा तय कर दी गई है।
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यूरोप और अमेरिका भी संकट की चपेट में
संपन्न यूरोपीय देश भी इस संकट से अछूते नहीं हैं। फ्रांस और पोलैंड के पेट्रोल पंपों पर डरे हुए लोगों की लंबी कतारें लगी हैं। जर्मनी में ईंधन की आसमान छूती कीमतों के कारण आम नागरिक निजी वाहनों को छोड़ सार्वजनिक परिवहन का रुख कर रहे हैं। अमेरिका में भी स्थिति चिंताजनक है, जहाँ फ्लोरिडा जैसे राज्यों में गैस की कीमतें रातों-रात 11 सेंट प्रति गैलन तक बढ़ गई हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज'?
विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया का लगभग 31% समुद्री कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग के रुकने से तेल की कीमतें $120 से $140 प्रति बैरल तक पहुँचने की आशंका है। वियतनाम ने स्थिति से निपटने के लिए टास्क फोर्स बनाई है, तो श्रीलंका ने कीमतों में 8% की बढ़ोतरी कर खपत कम करने की कोशिश की है। इंडोनेशिया अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए दोबारा B50 बायोडीजल योजना पर विचार कर रहा है।