Edited By Radhika,Updated: 25 Mar, 2026 11:46 AM

भारतीय एयर कंडीशनर (AC) उद्योग इस समय एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। नुवामा (Nuvama) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की भारी कमी ने एसी निर्माण प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया है। वैश्विक भू-राजनीतिक...
AC price Hike: भारतीय एयर कंडीशनर (AC) उद्योग इस समय एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। नुवामा (Nuvama) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की भारी कमी ने एसी निर्माण प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण सरकार ने घरेलू एलपीजी खपत को प्राथमिकता दी है, जिसके चलते कमर्शियल यूजर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनियों के पास ईंधन का कोटा सिमट गया है।
उत्पादन लागत में भारी उछाल
एसी बनाने की प्रक्रिया में 'हीट एक्सचेंजर ब्रेजिंग' के लिए एलपीजी सबसे महत्वपूर्ण और कुशल ईंधन माना जाता है। इसकी किल्लत होने के कारण अब कंपनियां 'ऑक्सी-एसिटिलीन' (Oxy-acetylene) जैसे महंगे विकल्पों का रुख कर रही हैं। हालांकि, यह विकल्प भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि इसकी निर्भरता कच्चे तेल और चूना पत्थर (Limestone) के आयात पर है। रिपोर्ट बताती है कि भारत अपनी जरूरत का 94% चूना पत्थर मिडिल ईस्ट से आयात करता है, जिससे वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है।

कंपनियों ने बढ़ाए दाम, ग्राहकों की जेब पर बोझ
उत्पादन लागत में हुई इस वृद्धि का असर अब सीधे ग्राहकों पर पड़ने लगा है।
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LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने एयर कंडीशनर के सभी मॉडल्स पर 10% और अन्य श्रेणियों में 5% तक की मूल्य वृद्धि की घोषणा की है।
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जनवरी 2026 से अब तक रूम एसी की कीमतों में करीब 9 से 10 प्रतिशत का इजाफा पहले ही देखा जा चुका है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि नए स्टार रेटिंग नियमों और भारतीय रुपये की गिरावट को देखते हुए कुल कीमतों में 8 से 14 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी अनिवार्य हो सकती है।
मौसम और मार्जिन की चुनौती
2025 की सुस्त गर्मी के बाद कंपनियों को इस साल बेहतर कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन उत्तर भारत में हो रही बेमौसम बारिश ने मांग को फिलहाल धीमा कर दिया है। नुवामा रिपोर्ट के अनुसार, जहां बड़े ब्रांड्स चौथी तिमाही (Q4FY26) में मामूली राजस्व वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं ईएमएस (EMS) क्षेत्र की कंपनियों के लिए राजस्व और मुनाफे (Margins) दोनों मोर्चों पर चुनौतियां बढ़ने वाली हैं।