Edited By Anu Malhotra,Updated: 28 Mar, 2026 04:48 PM

Parents arrange marriage for dead son: तेलंगाना के महबूबाबाद जिले से प्यार और ममता की एक ऐसी कहानी सामने आई है जो जितनी हैरान करती है, उतनी ही भावुक भी कर देती है. यहां एक माता-पिता अपने बेटे की याद को सिर्फ आंसुओं में नहीं, बल्कि एक उत्सव के रूप...
Parents arrange marriage for dead son: तेलंगाना के महबूबाबाद जिले से प्यार और ममता की एक ऐसी कहानी सामने आई है जो जितनी हैरान करती है, उतनी ही भावुक भी कर देती है. यहां एक माता-पिता अपने बेटे की याद को सिर्फ आंसुओं में नहीं, बल्कि एक उत्सव के रूप में ज़िंदा रखे हुए हैं. लालू और सुक्कम्मा का बेटा राम कोटी साल 2003 में इस दुनिया को छोड़ गया था। वजह थी उसकी अधूरी प्रेम कहानी, जिसे समाज और परिवार की बंदिशों ने मुकम्मल नहीं होने दिया. गमगीन राम कोटी ने आत्महत्या कर ली और उसके कुछ समय बाद उसकी प्रेमिका ने भी दम तोड़ दिया।
इस दोहरे दुख ने परिवार को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन फिर शुरू हुआ एक अनोखा सिलसिला. सुक्कम्मा का कहना है कि उनका बेटा उनके सपनों में आया और अपनी शादी करवाने की इच्छा जताई। बेटे की इसी अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए माता-पिता ने घर में ही एक छोटा सा मंदिर बनवा दिया, जहाँ राम कोटी और उसकी प्रेमिका की मूर्तियां स्थापित की गईं।
हैरानी की बात यह है कि पिछले 23 वर्षों से यह दंपति हर साल राम नवमी के पावन अवसर पर अपने मृत बेटे और उसकी प्रेमिका का विवाह पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराते हैं। मंत्रोच्चार, पारंपरिक रस्में, पूजा-पाठ और प्रसाद- सब कुछ वैसा ही होता है जैसा किसी जीवित जोड़े की शादी में होता है।
वक्त के साथ यह आयोजन केवल एक परिवार का निजी मामला नहीं रहा, बल्कि अब यह पूरे गांव की आस्था का केंद्र बन चुका है. राम नवमी के दिन गाँव वाले बड़ी संख्या में यहां जुटते हैं और इस अनोखे विवाह के साक्षी बनते हैं। यह परंपरा दिखाती है कि कैसे एक परिवार ने अपने गहरे जख्मों को भरने के लिए आस्था का सहारा लिया और एक दुखद अंत को 'अमर प्रेम' के उत्सव में बदल दिया।