Edited By Anu Malhotra,Updated: 24 Feb, 2026 01:58 PM

महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों राजधानी दिल्ली तक हलचल तेज है। राज्य की छह राज्यसभा सीटों के लिए होने वाली जंग अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। विधानसभा के मौजूदा गणित को देखते हुए सत्ताधारी 'महायुति' गठबंधन के पाले में 6 में से 5 सीटें...
नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों राजधानी दिल्ली तक हलचल तेज है। राज्य की छह राज्यसभा सीटों के लिए होने वाली जंग अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। विधानसभा के मौजूदा गणित को देखते हुए सत्ताधारी 'महायुति' गठबंधन के पाले में 6 में से 5 सीटें जाती दिख रही हैं, जबकि विपक्षी 'महाविकास आघाड़ी' के खाते में एक सीट लगभग पक्की है। लेकिन असली रोमांच उम्मीदवारों के चयन और पर्दे के पीछे चल रही सियासी घेराबंदी को लेकर है।
BJP से ये 4 बड़े चेहरे रेस में
भारतीय जनता पार्टी इस बार चार सीटों पर अपने सिपाही उतारने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास पर होने वाली अहम बैठक में इन नामों पर अंतिम मुहर लगनी है। चर्चाओं के बाजार में सबसे बड़ा नाम विनोद तावड़े का है। अगर तावड़े को राज्यसभा भेजा जाता है, तो इसे उनकी मुख्यधारा की सक्रिय राजनीति में धमाकेदार वापसी के तौर पर देखा जाएगा। उनके साथ ही विजया रहाटकर और धैर्यशील पाटील जैसे चेहरों पर भी दांव लगाया जा सकता है, जबकि रामदास अठाव ले की सीट लगभग सुरक्षित मानी जा रही है।
गठबंधन के अन्य साथियों की बात करें तो अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस में पार्थ पवार का नाम सबसे आगे चल रहा है। सुनील तटकरे के संकेतों से साफ है कि पार्टी के भीतर पार्थ को दिल्ली भेजने की पुरजोर इच्छा है। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में भी खींचतान कम नहीं है। पूर्व सांसद राहुल शेवाले रेस में सबसे आगे हैं, हालांकि अनुभवी नेता गजानन कीर्तिकर की दावेदारी ने मामले को दिलचस्प बना दिया है।
एक सीट को लेकर रस्साकशी जारी
दूसरी तरफ, विपक्ष यानी महाविकास आघाड़ी के खेमे में एक सीट को लेकर रस्साकशी जारी है। कांग्रेस और उद्धव गुट दोनों इस सीट पर अपना दावा ठोक रहे हैं, लेकिन सबकी निगाहें अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे शरद पवार पर टिकी हैं। 85 वर्षीय पवार की 60 सालों की संसदीय पारी क्या आगे भी जारी रहेगी, इसका फैसला उनके स्वास्थ्य और इच्छा पर निर्भर है। उनके पोते रोहित पवार का कहना है कि पूरा कुनबा उन्हें दोबारा सदन में देखना चाहता है।
अजित पवार के असामयिक निधन के बाद बदले हुए हालातों में यह चुनाव और भी महत्वपूर्ण हो गया है। वोटों के गणित को देखें तो विपक्ष के पास जीत के लिए जरूरी आंकड़ों से ज्यादा विधायक हैं, लेकिन सत्ता पक्ष की पैनी नजर किसी भी संभावित सेंधमारी पर टिकी है। अगले दो दिनों में जब नामांकन की तस्वीर साफ होगी, तब पता चलेगा कि महाराष्ट्र से दिल्ली की उड़ान कौन भरेगा।