Edited By Mehak,Updated: 16 Jan, 2026 04:04 PM

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि राज्य में चल रहे वोटर लिस्ट संशोधन के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मालदा जिले में करीब 90 हजार वोटरों के नाम...
नेशनल डेस्क : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के वोटरों को जानबूझकर मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है।
शुक्रवार को कोलकाता एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया कि अल्पसंख्यक बहुल मालदा जिले में करीब 90 हजार वोटरों के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय की शिकायत पूरी तरह जायज है, क्योंकि सबसे ज्यादा निशाना उन्हीं के वोटरों को बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि मतुआ, राजवंशी और आदिवासी जैसे पिछड़े वर्गों के वोटरों को भी इस प्रक्रिया में परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि मशहूर हस्तियों तक के नाम सूची से हटाने की बात सामने आ रही है। ममता बनर्जी के अनुसार, अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन और प्रसिद्ध कवि जय गोस्वामी जैसे लोगों के नाम भी इसमें शामिल बताए जा रहे हैं।

ममता बनर्जी शुक्रवार को उत्तर बंगाल रवाना होने से पहले यह बयान दे रही थीं। वह दार्जिलिंग जिले के माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी इलाके में महाकाल मंदिर का उद्घाटन करने वाली हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके में चल रहे तनाव पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। यह तनाव एक प्रवासी मजदूर के शव के लौटने के बाद शुरू हुआ है, जिसकी कथित तौर पर झारखंड में हत्या कर दी गई थी।
ममता बनर्जी ने कहा कि बेलडांगा में लोगों को भड़काने के पीछे कौन है, यह सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में जानबूझकर हिंसा फैलाने की कोशिश हो रही है और इसके पीछे भाजपा का हाथ है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में केंद्रीय एजेंसियों का भी दुरुपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों को भाजपा शासित राज्यों में खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है और वहां उनकी हत्याएं तक हो रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार ऐसे मामलों पर नजर रखे हुए है और पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।

हालांकि, ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई पर कोई टिप्पणी नहीं की। शीर्ष अदालत ने हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी है। ये एफआईआर कोलकाता में राजनीतिक सलाहकार संस्था आई-पैक (I-PAC) और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान कथित बाधा को लेकर दर्ज की गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन याचिकाओं में केंद्रीय जांच में राज्य एजेंसियों के हस्तक्षेप जैसे गंभीर सवाल उठते हैं। इसके बाद जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा समेत अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।