अब न आकाश न समंदर, भारत पर हमला नहीं कर पाएगा चीन-पाकिस्तान! सरकार ने बना लिया 44000 करोड़ का प्लान

Edited By Updated: 27 May, 2025 07:34 AM

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चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारतीय नौसेना को और मजबूत करने का फैसला लिया है। इसी दिशा में रक्षा मंत्रालय ने 44,000 करोड़ रुपये की लागत से 12 माइन काउंटरमेजर वेसल्स (MCMV) यानी ‘बारूदी सुरंग खोजी और...

नई दिल्ली:  ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारतीय वायुसेना और थल सेना ने जिस तरह से दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया, उसने दुनिया को भारत की सैन्य ताकत का अंदाज़ा करा दिया। अब सरकार समुद्री सुरक्षा को भी नई धार देने जा रही है। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारतीय नौसेना को और मजबूत करने का फैसला लिया है। इसी दिशा में रक्षा मंत्रालय ने 44,000 करोड़ रुपये की लागत से 12 माइन काउंटरमेजर वेसल्स (MCMV) यानी ‘बारूदी सुरंग खोजी और नष्ट करने वाले युद्धपोत’ बनाने की योजना को हरी झंडी दिखा दी है।

समुद्र की चुप्पी में छिपे खतरे होंगे खत्म

इन विशेष युद्धपोतों की सबसे बड़ी ताकत यह होगी कि ये समुद्र की गहराइयों में दुश्मन द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को ढूंढने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम होंगे। भारत की विशाल 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा और सैकड़ों पोर्ट्स की सुरक्षा के लिए ऐसे जहाज अब ज़रूरत बन चुके हैं।

भारतीय नौसेना के पास नहीं है एक भी MCMV

फिलहाल भारतीय नौसेना के पास एक भी समर्पित माइन हंटर पोत मौजूद नहीं है। पहले मौजूद करवार और पॉन्डिचेरी क्लास के पोत रिटायर हो चुके हैं। अब कुछ गिने-चुने जहाजों पर क्लिप-ऑन माइन काउंटरमेजर सुइट्स लगे हैं, लेकिन ये देश की समग्र समुद्री सुरक्षा के लिहाज़ से काफी नहीं हैं।

भारत में ही होगा निर्माण, मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने यह तय किया है कि इन 12 MCMV को पूरी तरह से भारतीय शिपयार्ड्स में ही बनाया जाएगा। इससे ना सिर्फ नौसेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूत प्रोत्साहन मिलेगा। यह परियोजना लंबे समय से ठप पड़ी थी, लेकिन अब इसे दोबारा शुरू किया जा रहा है।

7-8 साल में बनकर तैयार होंगे पहले युद्धपोत

रक्षा मंत्रालय जल्द ही इस परियोजना को डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के समक्ष प्रस्तुत करेगा। एसेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AON) मिलते ही टेक्नो-कमर्शियल बिड्स मंगाई जाएंगी और अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके बाद पहला पोत तैयार होने में लगभग 7 से 8 साल का समय लगेगा।

समुद्री सीमा की सुरक्षा होगी और सख्त

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह परियोजना रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, खासकर तब जब चीन की पनडुब्बियां और पाकिस्तान की युआन-क्लास डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन लगातार भारत के समुद्री हितों के लिए खतरा बनी हुई हैं। ऐसे में माइन काउंटरमेजर वेसल्स की तैनाती भारत को समुद्री मोर्चे पर और अधिक सक्षम बनाएगी।

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