भारत-चीन के बीच बने मिलिट्री बफर जोन के करीब नई इमारतें बना रहा China, सामने आई सैटेलाइट तस्वीरें

Edited By Updated: 06 Jan, 2026 06:02 PM

new chinese structures pangong lake pangong tso buffer zone

पूर्वी लद्दाख के बर्फीले और रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके पैंगोंग त्सो में चीन की गतिविधियां एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाई-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि चीन इस विवादित क्षेत्र में अपनी स्थायी सैन्य मौजूदगी को लगातार मजबूत कर...

नेशनल डेस्क: पूर्वी लद्दाख के बर्फीले इलाके पैंगोंग त्सो में चीन की गतिविधियां एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाई-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि चीन इस विवादित क्षेत्र में अपनी स्थायी सैन्य मौजूदगी को लगातार मजबूत कर रहा है। भारत-चीन के बीच बने मिलिट्री बफर जोन के करीब China नई इमारतें बना रहा है। यह निर्माण उस इलाके के पास हो रहा है, जो 1962 के युद्ध के बाद से चीन के नियंत्रण में है, हालांकि भारत आज भी इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है।

झील के बेहद करीब बन रहा नया सैन्य परिसर

ताज़ा तस्वीरों में पैंगोंग त्सो झील के किनारे एक नए परिसर का निर्माण साफ दिखाई देता है, जिसमें कई पक्की इमारतें खड़ी की जा रही हैं। ये ढांचे पानी से महज कुछ मीटर की दूरी पर हैं। इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इससे चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को मौजूदा बफर जोन के बेहद पास अधिक संसाधन और सैन्य साजो-सामान तैनात करने की सुविधा मिल सकती है।

2013 से शुरू हुई थी आधारभूत तैयारी

इस इलाके में चीन ने वर्ष 2013 में सड़क नेटवर्क विकसित किया था, जिसका इस्तेमाल शुरुआती दौर में दोनों देशों की सेनाएं गश्त के लिए करती थीं। लेकिन मई 2020 में हुए सीमा गतिरोध के बाद भारतीय गश्ती दलों की यहां मौजूदगी रुक गई। तभी से चीन ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ और मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए।

अस्थायी ढांचों से स्थायी निर्माण की ओर

2020 के बाद से चीनी सेना ने यहां अस्थायी ढांचों का इस्तेमाल किया, जिनमें सैनिकों के रहने की व्यवस्था, झील में आवाजाही के लिए नावें और एक पियर शामिल था। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों में पुराने अस्थायी ढांचों के साथ-साथ नए स्थायी निर्माण स्थल भी साफ नजर आते हैं। दिसंबर के अंत की तस्वीरों में निर्माण कार्य तेज होता दिख रहा है, जबकि जून में झील के पास दिखने वाली नावें अब ढकी हुई और पानी से दूर खड़ी दिखाई दे रही हैं, संभवतः सर्दियों में झील के जमने की आशंका के चलते।

2025 के दूसरे हिस्से में बढ़ी रफ्तार

विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 के उत्तरार्ध में इस साइट पर निर्माण की गति और तेज हो गई। दिसंबर की तस्वीरों में इमारतों का ढांचा स्पष्ट रूप से उभरता दिखता है, जो यह संकेत देता है कि यह परियोजना अस्थायी नहीं बल्कि दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है।

रिश्तों में नरमी, लेकिन जमीनी हकीकत अलग

पिछले एक साल में भारत-चीन संबंधों में कुछ हद तक सुधार देखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात साल बाद चीन यात्रा, एससीओ शिखर सम्मेलन में भागीदारी और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली को सकारात्मक संकेत माना गया। पूर्वी लद्दाख में सभी टकराव बिंदुओं से “डिसएंगेजमेंट” की बात भी सामने आई, जिससे पहले जैसी आमने-सामने की तैनाती में कमी आई।

लेकिन इन कूटनीतिक कदमों के बीच चीन का यह नया निर्माण उसके इरादों पर सवाल खड़े करता है। भू-स्थानिक विशेषज्ञों का मानना है कि पैंगोंग त्सो के पास किया जा रहा यह निर्माण चीन की उस पुरानी रणनीति के अनुरूप है, जिसमें वह स्थायी ढांचे बनाकर अपनी मौजूदगी को नियंत्रण में बदलने की कोशिश करता है। यह परियोजना 2020 के बाद बने डिसएंगेजमेंट जोन के ठीक बाहर स्थित है और कठोर मौसम में भी सालभर सैन्य संचालन को संभव बना सकती है।

विवादित दावे और भविष्य की चुनौती

हालांकि यह निर्माण उस क्षेत्र में हो रहा है, जो फिलहाल चीन के नियंत्रण में है, लेकिन वह व्यापक इलाका भारत के दावे में भी शामिल है। ऐसे में यह गतिविधि न सिर्फ चीन की दीर्घकालिक मौजूदगी का संकेत देती है, बल्कि विवादित इलाकों में उसकी संप्रभुता को मजबूत करने की कोशिश भी मानी जा रही है, जो भारत की स्थिति को कमजोर कर सकती है।

अन्य सैन्य ढांचे भी बन रहे हैं

इससे पहले सामने आई रिपोर्टों में यह भी खुलासा हुआ था कि चीन ने इस क्षेत्र में नए एयर डिफेंस साइट्स विकसित किए हैं, जहां मिसाइल ले जाने और दागने में सक्षम ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर (TEL) वाहनों के लिए कवर और रिट्रैक्टेबल शेड बनाए गए हैं। इसके अलावा, विवादित इलाके से थोड़ी दूरी पर एक बड़ा नया सेटलमेंट भी विकसित किया जा रहा है, जिसे कई जानकार दोहरे उपयोग वाला ठिकाना मानते हैं।

बातचीत जारी, लेकिन सतर्कता जरूरी

विदेश मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर 2024 तक भारत और चीन ने एलएसी से जुड़े मुद्दों पर WMCC और वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तर की बैठकों के जरिए संवाद जारी रखा। 2024 में डिसएंगेजमेंट के बाद भी दोनों पक्षों के बीच रिश्तों को स्थिर और बेहतर बनाने के लिए कई बैठकें हुईं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा, सीधी उड़ानें, सीमा पार नदियां और कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने जैसे विषय शामिल रहे।

 

Related Story

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!