Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Apr, 2026 11:00 AM

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest से जुड़ा एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जिसने एडवेंचर टूरिज्म की दुनिया को हिला कर रख दिया है। नेपाल में हुई एक बड़ी जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ गाइड और ट्रेकिंग एजेंसियां मिलकर विदेशी पर्यटकों के साथ...
इंटरनेशनल डेस्क: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest से जुड़ा एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जिसने एडवेंचर टूरिज्म की दुनिया को हिला कर रख दिया है। नेपाल में हुई एक बड़ी जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ गाइड और ट्रेकिंग एजेंसियां मिलकर विदेशी पर्यटकों के साथ सुनियोजित धोखाधड़ी कर रही थीं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, गाइड्स पर्यटकों के खाने में बेकिंग सोडा मिलाकर उन्हें जानबूझकर बीमार कर देते थे। इससे पर्यटकों को उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती थीं, जो देखने में ऊंचाई पर होने वाली बीमारी (एल्टीट्यूड सिकनेस) या फूड पॉइजनिंग जैसी लगती थीं। जब पर्यटक अचानक बीमार पड़ जाते, तो उन्हें डराकर तुरंत महंगे हेलिकॉप्टर रेस्क्यू के लिए राजी किया जाता। इसके बाद फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और उड़ान दस्तावेज तैयार कर अंतरराष्ट्रीय इंश्योरेंस कंपनियों से मोटी रकम वसूली जाती थी।
नेपाल पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 32 लोगों पर संगठित अपराध और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। इसमें ट्रेकिंग कंपनी के मालिक, हेलिकॉप्टर ऑपरेटर और कुछ अस्पतालों के अधिकारी भी शामिल हैं। जांच की शुरुआत इस साल जनवरी में हुई थी, जब तीन प्रमुख रेस्क्यू कंपनियों के छह अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क ने करीब 20 मिलियन डॉलर (लगभग 160 करोड़ रुपये) की धोखाधड़ी की।
एक कंपनी पर आरोप है कि उसने 1,248 रेस्क्यू में से 171 मामलों को फर्जी दिखाकर 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम हासिल की। दूसरी कंपनी ने 471 में से 75 रेस्क्यू फर्जी बताकर करीब 8 मिलियन डॉलर की ठगी की, जबकि तीसरी कंपनी ने 71 फर्जी मामलों के जरिए 1 मिलियन डॉलर से ज्यादा वसूले। इन सभी मामलों में अभियोजन पक्ष ने कुल 11.3 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाने की मांग की है। कोर्ट भी इस हाई-प्रोफाइल केस को प्राथमिकता के साथ देख रहा है।

गौरतलब है कि नेपाल का पर्यटन उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और इससे सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। लेकिन इस तरह के घोटाले पहले भी सामने आ चुके हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचा है। बीते कुछ सालों में कई बड़ी इंश्योरेंस कंपनियों ने नेपाल में ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों को कवर देना भी बंद कर दिया था, क्योंकि ऐसे फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे थे।

हालांकि 2018 में नेपाल सरकार ने ऐसे बिचौलियों पर रोक लगाने और टूर कंपनियों को सीधे जिम्मेदार बनाने के लिए सख्त नियम लागू किए थे, लेकिन कमजोर कार्रवाई के कारण यह घोटाला फिर भी चलता रहा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब अपराध पर सख्ती से कार्रवाई नहीं होती, तो ऐसे नेटवर्क और मजबूत हो जाते हैं। फिलहाल इस मामले ने एक बार फिर पर्यटन सुरक्षा और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।