पत्नी के साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Edited By Updated: 30 May, 2025 02:37 PM

mp high court gave big decision on forced unnatural se x with wife

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है, जो पति-पत्नी के रिश्ते और कानून की व्याख्या को लेकर बड़ी कानूनी मिसाल बन सकता है। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि पति पत्नी के साथ उसकी इच्छा के खिलाफ अप्राकृतिक यौन संबंध...

नेशनल डेस्क: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है, जो पति-पत्नी के रिश्ते और कानून की व्याख्या को लेकर बड़ी कानूनी मिसाल बन सकता है। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि पति पत्नी के साथ उसकी इच्छा के खिलाफ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाता है, तो इसे "दुष्कर्म" यानी रेप नहीं माना जाएगा, लेकिन यह "क्रूरता" की श्रेणी में जरूर आता है। यह फैसला उस याचिका पर आया है जो एक पति ने अपनी पत्नी द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 377 और 498ए के तहत दर्ज किए गए केस को रद्द कराने के लिए दायर की थी।

क्या था मामला?

सिरोल इलाके में रहने वाले युवक का विवाह 2 मई 2023 को हुआ था। विवाह के बाद पत्नी ने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में मामला दर्ज कराया। पत्नी ने कहा कि शादी के पहले दिन से ही पति शराब पीकर जबरन उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाता था। जब वह इसका विरोध करती तो उसके साथ मारपीट की जाती। इसके साथ ही पत्नी ने दहेज में 5 लाख रुपये, बाइक और अन्य सामान मांगे जाने की शिकायत भी की थी। इसी के आधार पर पति पर भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन कृत्य) और 498ए (दहेज प्रताड़ना) के तहत केस दर्ज किया गया था।

पति की याचिका पर हाईकोर्ट की सुनवाई

पति ने ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर कर यह अपील की कि दोनों ही धाराओं के तहत दर्ज केस को रद्द किया जाए। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि धारा 375 में संशोधन के अनुसार यदि पत्नी बालिग है, तो पति द्वारा बनाए गए यौन संबंध even अगर वे अप्राकृतिक हों रेप की श्रेणी में नहीं आते। इसके लिए धारा 376 (रेप) और 377 (अप्राकृतिक कृत्य) का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

कोर्ट का क्या कहना है?

ग्वालियर हाईकोर्ट की बेंच ने इस दलील को स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की कि "यदि पति अपनी पत्नी के साथ बिना उसकी इच्छा के अप्राकृतिक यौन संबंध बनाता है, तो यह भले ही दुष्कर्म नहीं माना जाएगा, लेकिन यह क्रूरता के दायरे में जरूर आता है।" कोर्ट ने साफ किया कि भारतीय कानून की वर्तमान स्थिति में, यदि पत्नी बालिग है, तो पति के खिलाफ धारा 377 के तहत मुकदमा नहीं बनता। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि जबरदस्ती इस तरह के संबंध बनाना और मना करने पर मारपीट करना मानसिक और शारीरिक क्रूरता है।

धारा 377 का केस हुआ खारिज, 498ए कायम

कोर्ट ने इस याचिका पर निर्णय देते हुए पति के खिलाफ दर्ज धारा 377 का केस निरस्त कर दिया। मगर पत्नी द्वारा लगाए गए दहेज प्रताड़ना (498ए) के आरोपों को गंभीर मानते हुए उसे खारिज करने से इनकार कर दिया। यानी अब पति पर केवल दहेज उत्पीड़न का केस जारी रहेगा जबकि अप्राकृतिक संबंध से जुड़ा मामला बंद कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी लिया गया सहारा

अपर लोक अभियोजक डीके शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने फैसला सुनाते समय सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व मामलों का हवाला दिया। इन मामलों में भी स्पष्ट किया गया है कि पति-पत्नी के बीच ऐसे यौन संबंध, चाहे वे नैतिक हों या नहीं, यदि पत्नी बालिग है, तो रेप की श्रेणी में नहीं आएंगे। हालांकि ये क्रूरता के दायरे में आते हैं और ऐसे मामलों में पत्नी को अन्य कानूनों के तहत संरक्षण दिया जा सकता है, जैसे कि घरेलू हिंसा कानून या दहेज प्रताड़ना।

 

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