उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश के न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी की रद्द

Edited By Updated: 05 Jan, 2026 12:41 PM

supreme court quashes dismissal of madhya pradesh judicial officer

उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश के उस न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को सोमवार को रद्द कर दिया जिस पर आबकारी अधिनियम के तहत आरोपियों को जमानत देने में अलग-अलग मापदंड अपनाने और भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप था। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और...

नेशनल डेस्क। उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश के उस न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को सोमवार को रद्द कर दिया जिस पर आबकारी अधिनियम के तहत आरोपियों को जमानत देने में अलग-अलग मापदंड अपनाने और भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप था। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारी को 27 वर्ष तक न्यायपालिका में ‘‘बेदाग'' सेवा रिकॉर्ड के साथ काम करने के बावजूद समुचित प्रक्रिया का पालन किए बिना सेवा से हटाया गया। 

पीठ ने अधीनस्थ न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ पीड़ित पक्षों के कहने पर तुच्छ आरोप लगाए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई और ऐसे अधिकारियों की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘इसी कारण अधीनस्थ न्यायपालिका के अधिकारी जमानत देने से हिचकते हैं और उच्च न्यायालयों एवं उच्चतम न्यायालय पर जमानत याचिकाओं का बोझ बढ़ जाता है।'' उसने साथ ही कहा कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई सहित कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। 

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि बार के सदस्य भी न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ तुच्छ आरोप लगाने में लिप्त रहते हैं और उसने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी। पीठ की ओर से फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने कहा कि उच्च न्यायालयों को केवल परस्पर विरोधी न्यायिक आदेशों के कारण न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। 

न्यायमूर्ति पारदीवाला ने निर्णय से सहमति जताते हुए न्यायमूर्ति विश्वनाथन द्वारा लिखे फैसले की सराहना की और कहा कि यह ‘‘बहुत साहसिक फैसला'' है, जो ईमानदार न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में काफी मदद करेगा। शीर्ष अदालत ने मध्यप्रदेश के न्यायिक अधिकारी निर्भय सिंह सुलिया को उनकी सेवानिवृत्ति तक पूर्ण मौद्रिक लाभ देने का निर्देश दिया और सितंबर, 2015 के बर्खास्तगी के आदेश तथा उनकी सेवा समाप्ति को बरकरार रखने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश को भी रद्द कर दिया। 

Related Story

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!