farmers protest: राहुल गांधी के आरोपों पर सरकार का पलटवार, कहा- कांग्रेस पहले अपना मेनिफेस्टो पढ़े

Edited By Updated: 15 Jan, 2021 06:14 PM

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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके बयान पर और कृत्य पर कांग्रेस पार्टी सिर्फ हंसती है और उनका मजाक उड़ाती है। कांग्रेस ने 2019 के घोषणापत्र में इन कृषि सुधारों का वादा लिखित में किया...

नेशनल डेस्क: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके बयान पर और कृत्य पर कांग्रेस पार्टी सिर्फ हंसती है और उनका मजाक उड़ाती है। कांग्रेस ने 2019 के घोषणापत्र में इन कृषि सुधारों का वादा लिखित में किया था, अगर उन्हें याद नहीं है तो घोषणापत्र उठाकर दोबारा पढ़ लें। 

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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों पर सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा हुई, लेकिन निर्णायक बिंदु तक नहीं पहुंच सके।  सरकार ने ठोस प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए किसान यूनियनों को अनौपचारिक समूह बनाने का सुझाव दिया ताकि औपचारिक वार्ता में इन प्रस्तावों पर चर्चा की जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार को 19 जनवरी को होने वाले, वार्ता के दसवें दौर में कुछ निर्णायक स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है हम उच्चतम न्यायालय के आदेशों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं और उनके फैसले का स्वागत करते हैं। सरकार आमंत्रित किए जाने पर, न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति के समक्ष अपना पक्ष रखेगी। उम्होंने कहा कि किसान यूनियनें सरकार के साथ बातचीत जारी रखना चाहती हैं और हमें इससे कोई समस्या नहीं है। 

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 अगले दौर की वार्ता 19 जनवरी को होगी 
 तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ शुक्रवार को हुई नौवें दौर की वार्ता में प्रदर्शनकारी किसान तीन नए विवादित कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे जबकि सरकार ने किसान नेताओं से उनके रुख में लचीलापन दिखाने की अपील की एवं कानून में जरूरी संशोधन के संबंध अपनी इच्छा जतायी। इस दौर की वार्ता के अंत में दोनों पक्षों ने तय किया कि अगली बैठक 19 जनवरी को होगी । किसान नेता जोगिन्दर सिंह उग्रहान ने संवाददाताओं से बैठक के बाद कहा कि किसान संगठनों ने सरकार से तीनों कानून रद्द करने का आग्रह किया लेकिन केंद्र ऐसा करने को अनिच्छुक दिखी। उन्होंने कहा, हमने 19 जनवरी को दोपहर 12 बजे फिर से मिलने का फैसला किया है। उग्रहान ने कहा कि बैठक के दौरान किसान संगठनों के नेताओं ने पंजाब के उन ट्रांसपोर्टरों पर एनआई के छापे का मुद्दा उठाया जो किसान विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं और आवाजाही की सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। भोजनावकाश सहित करीब पांच घंटे तक चली बैठक में किसान संगठनों ने कहा कि वे तीन कृषि कानूनों को लेकर जारी गतिरोध को दूर करने के लिये सीधी वार्ता जारी रखने को प्रतिबद्ध हैं। 

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