Edited By Anu Malhotra,Updated: 01 Feb, 2026 09:04 AM

आज 1 फरवरी की सुबह भारतीय लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक पल लेकर आई है। संसद भवन का मकर द्वार फूलों से महक रहा है और पूरे देश की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। आज वह अपना लगातार 9वां बजट पेश करने जा रही हैं, जो न केवल...
नेशनल डेस्क: आज 1 फरवरी की सुबह भारतीय लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक पल लेकर आई है। संसद भवन का मकर द्वार फूलों से महक रहा है और पूरे देश की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। आज वह अपना लगातार 9वां बजट पेश करने जा रही हैं, जो न केवल उनके नाम एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज करेगा, बल्कि करोड़ों भारतीयों की किस्मत का फैसला भी करेगा। इसे सरकार के गलियारों में 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का नाम दिया जा रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि इस बार बड़े बदलावों की तैयारी है।
वित्त मंत्री सुबह-सुबह अपने आवास से कर्तव्य भवन (वित्त मंत्रालय का नया मुख्यालय) पहुंचीं और वहां से राष्ट्रपति भवन की ओर रवाना हुईं। यह बजट एक ऐसे मोड़ पर आ रहा है जब दुनिया भर में तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव का माहौल है, लेकिन भारत की घरेलू मांग और विकास की रफ्तार ने उम्मीदें जगा रखी हैं। इकोनॉमिक सर्वे की हालिया रिपोर्ट भी यही कहती है कि भारत आने वाले समय में 7 प्रतिशत के करीब विकास दर हासिल कर सकता है, बशर्ते हम रोजगार और सेहत जैसी चुनौतियों का सामना मजबूती से करें।
आम आदमी की आंखों में आज कई सपने हैं। रेलवे स्टेशनों पर सफर कर रहे यात्रियों से लेकर दफ्तरों में काम करने वाले आईटी पेशेवरों तक, हर कोई बस एक ही बात पूछ रहा है—क्या इस बार टैक्स स्लैब में बदलाव होगा? क्या महंगाई कम करने के लिए सरकार कोई जादुई पिटारा खोलेगी? दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर मौजूद लोग ट्रेनों की देरी और भीड़ से निजात पाने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश की मांग कर रहे हैं, वहीं Middile class चाहता है कि 'new tax system' को और भी लुभावना बनाया जाए ताकि हाथ में कुछ ज्यादा पैसे बच सकें।
सिर्फ घरेलू मोर्चे पर ही नहीं, यह बजट वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को भी प्रभावित करेगा। शिपिंग इंडस्ट्री से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, सरकार का जोर आत्मनिर्भरता पर रहने वाला है। उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक, नेताओं और जनता को भरोसा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह बजट देश को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के सफर में एक मील का पत्थर साबित होगा। अगले कुछ घंटों में जब निर्मला सीतारमण अपना भाषण शुरू करेंगी, तब यह साफ हो जाएगा कि क्या सरकार विकास की रफ्तार और वित्तीय संतुलन के बीच वह बारीक तालमेल बैठा पाएगी, जिसकी उम्मीद हर निवेशक कर रहा है।