Edited By Parveen Kumar,Updated: 14 Oct, 2026 06:26 PM

कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने बुधवार को कहा कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ उनकी कोई ''निजी दुश्मनी'' नहीं है और अगर दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ''डबल इंजन'' सरकार के खिलाफ जीत हासिल करनी...
नेशनल डेस्क : कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने बुधवार को कहा कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ उनकी कोई ''निजी दुश्मनी'' नहीं है और अगर दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ''डबल इंजन'' सरकार के खिलाफ जीत हासिल करनी है तो कांग्रेस के सभी नेताओं को एकजुट होकर काम करना होगा। पायलट ने 'पीटीआई पॉडकास्ट' में यह भी कहा कि गहलोत 'बड़े-बुजुर्ग' हैं और इस नाते कुछ बातें कह सकते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या गहलोत के साथ पूर्व में रहे मतभेद अब खत्म हो गए हैं तो पायलट ने कहा, ''बिल्कुल।'' गहलोत द्वारा हाल ही में उनके बारे में 2020 के प्रकरण को लेकर की गई टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस नेता ने कहा, ''नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। वह बहुत वरिष्ठ व्यक्ति हैं। उनके साथ काम किया है। कुछ मुद्दों पर आपके विचार भिन्न हो सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्तिगत दुश्मनी है।''
पायलट के मुताबिक, उन्होंने कभी भी राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत दुश्मनी में बदलने की कोशिश नहीं की। पायलट ने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर नेताओं की राय भिन्न होना स्वाभाविक है और हर व्यक्ति का अपनी बात कहने का तरीका भी अलग हो सकता है। उन्होंने कहा, ''वह बड़े बुजुर्ग हैं, (इस नाते) वह कुछ बातें कह सकते हैं।'' पायलट का कहना था, ''ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए जिन्हें आप खुद के बारे में सुनना पसंद नहीं करेंगे। मैं इसी तरह का व्यक्ति हूं।'' यह पूछे जाने पर कि क्या उनके मन में गहलोत के खिलाफ कुछ है, पायलट ने इससे साफ इनकार किया। उन्होंने कहा, ''नहीं। वास्तव में, अब हम मिलकर काम करते हैं और हम विपक्ष में हैं।
राजस्थान में दिसंबर 2028 में कांग्रेस को जीत हासिल करनी है तो हम सभी को मिलकर काम करना होगा।'' उन्होंने आरोप लगाया, ''हम केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार की डबल इंजन सरकार का मुकाबला कर रहे हैं। वे एजेंसियों और पुलिस का दुरुपयोग उस तरह कर रहे हैं जैसा पहले कभी नहीं हुआ। इस ताकत का मुकाबला करने के लिए हम सभी को एकजुट होकर लड़ना होगा। यह केवल मेरी बात नहीं है, राजस्थान में पूरी पार्टी को मिलकर लड़ना होगा।'' राजस्थान में 2028 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बनने की इच्छा से जुड़े सवाल पर पायलट ने कहा कि पहली प्राथमिकता कांग्रेस को चुनाव जिताने की है तथा मुख्यमंत्री का सवाल उसके बाद आएगा।
पायलट ने कहा कि इससे पहले भी विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस का ध्यान उन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने और जीत हासिल करने पर है। पायलट और गहलोत के बीच राजस्थान में कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान लंबे समय तक राजनीतिक खींचतान देखने को मिली थी। पायलट उस सरकार में उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे। पीटीआई के इस पॉडकास्ट में जब पायलट से ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद और मिलिंद देवड़ा जैसे उनके समकालीन नेताओं के कांग्रेस छोड़ने और उनके (पायलट) पार्टी में बने रहने के बारे में पूछा गया तो पायलट ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने राजनीतिक भविष्य और विचारधारा को लेकर स्वयं फैसला करता है और अंततः जनता ही इसका निर्णय करती है। उन्होंने कहा कि वह राजनीति में उतार-चढ़ाव के बावजूद अपनी राह पर कायम रहने में विश्वास करते हैं।
पायलट ने कहा कि उन्हें सांसद, केंद्रीय मंत्री, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री के रूप में काम करने का अवसर मिला है तथा पार्टी उन्हें जहां भी जिम्मेदारी देती है, वह वहां काम को लेकर संतुष्ट हैं। वर्ष 2018 में राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाने का वादा कांग्रेस आलाकमान की ओर से कथित तौर पर नहीं निभाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीति में किसी पद को लेकर कोई वादा नहीं होता और राजनीतिक परिस्थितियों के मुताबिक जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं। पायलट ने कहा कि उनकी प्राथमिकता पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारी को पूरी शिद्दत के साथ निभाने की है।