Edited By Hitesh,Updated: 25 Jun, 2021 04:07 PM

कोरोना वायरस संक्रमण की जांच करवाने के लिए अब आपको कहीं पर भी जाने की जरूरत नहीं है। ऑनलाइन शॉपिंग साइट फ्लिपकार्ट ने कोरोनी की जांच करने वाली कोविसेल्फ टेस्ट किट को बिक्री के लिए उपलब्ध कर दिया है। यह टेस्टिंग किट महज 15 मिनट में रिजल्ट देती है।...
नेशनल डेस्क: कोरोना वायरस संक्रमण की जांच करवाने के लिए अब आपको कहीं पर भी जाने की जरूरत नहीं है। ऑनलाइन शॉपिंग साइट फ्लिपकार्ट ने कोरोनी की जांच करने वाली कोविसेल्फ टेस्ट किट को बिक्री के लिए उपलब्ध कर दिया है। यह टेस्टिंग किट महज 15 मिनट में रिजल्ट देती है। कीमत की बात की जाए तो इस टेस्ट किट की कीमत 250 रुपए है।
इस किट को खरीदने के लिए फ्लिपकार्ट ने एक शर्त रखी है जिसमें आपको कम-से-कम दो किट को ऑर्डर करने को कहा जा रहा है। इसके अलावा इन किट की खरीद पर ऑफर भी दिया गया है। अगर आप एक साथ 5 किट ऑर्डर करते हैं तो आप 10 प्रतिशत तक की बचत कर सकते हैं।
आपको बता दें कि कोविसेल्फ को मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस ने डिवेल्प किया है। यह टैस्ट किट एक रैपिड एंटीजेन टैस्ट (आरएटी) किट है, जिसके उपयोग को लेकर एक एडवाईजरी भी जारी की गई है और इसी के बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं।
आईसीएमआर के दिशानिर्देशों के अनुसार घर पर कोविसेल्फ किट का इस्तेमाल उन्हीं लोगों को करना है जिनमें कोविड-19 के लक्षण पाए गए हैं, या फिर वो किसी कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आए हैं तभी इसका इस्तेमाल करना है। आईसीएमआर ने कहा कि घर पर जांच के लिए किट में दी गई गाइडलाइंस को ध्यानपूर्वक और आवश्यक रूप से पढ़ें।
ऐप से मिलेगी सहायता
गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर कोविसेल्फ मोबाइल ऐप को उपलब्ध किया गया है जिसमें आपको टैस्ट किट के इस्तेमाल करने की पूरी प्रक्रिया बताई गई है।
जांच में अगर आ गए पॉजिटिव तो यह करना होगा आपको
आईसीएमआर के दिशानिर्देशों के मुताबिक, कोविसेल्फ टैस्ट किट की जांच में जो लोग पॉजिटिव आ जाते हैं उन्हें दोबारा से कोई भी टैस्ट करवाने की जरूरत नहीं है। पॉजिटिव आने के बाद होम आइसोलेशन में रहने और आईसीएमआर एवं स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस के तहत जारी कोरोना नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है, वहीं अगर कुछ लोगों में इसके लक्षण पाए जाते हैं और वह कोविशसेल्फ किट की जांच से निगेटिव आ जाते हैं तो उन्हें आरटी-पीसीआर करा लेनी चाहिए। ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि कम वायरस लोड के कारण रैपिड एंटीजेन टेस्टिंग के जरिए कुछ मामलों में इसकी पुष्टि नहीं हो पाती है।