पाकिस्तान का हलक सूखा, सिंधु-चिनाब का पानी बंद करते ही तड़पने लगा PAK

Edited By Updated: 06 May, 2025 02:19 AM

pak started suffering as soon as the water supply of indus chenab was stopped

भारत के पानी बंद करने के बाद अब पाकिस्तान में इसका असर दिखने लगा है। सिंधु और चेनाब नदियों का पानी रोकने के कारण पाकिस्तान में खेतों में सूखा पड़ने लगा है। पाकिस्तान की इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) ने सोमवार को बताया कि चेनाब नदी का पानी बंद हो...

नेशनल डेस्क: भारत के पानी बंद करने के बाद अब पाकिस्तान में इसका असर दिखने लगा है। सिंधु और चिनाब नदियों का पानी रोकने के कारण पाकिस्तान में खेतों में सूखा पड़ने लगा है। पाकिस्तान की इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) ने सोमवार को बताया कि चेनाब नदी का पानी बंद हो गया है और अब वहां पानी की कमी हो रही है। अगर यह स्थिति और जारी रही तो पाकिस्तान में खरीफ फसल की बुवाई में परेशानी हो सकती है।

चावल और अन्य फसलों को होगा नुकसान

चिनाब नदी से पानी की कमी से चावल, कपास, गन्ना, मक्का, दालें और तिलहन जैसी फसलों की पैदावार पर असर पड़ेगा। पाकिस्तान के पंजाब और सिंध क्षेत्रों में ये फसलें उगाई जाती हैं, और यह क्षेत्र पाकिस्तान की खाद्य आपूर्ति का बड़ा हिस्सा है। पानी की कमी के कारण इन फसलों का उत्पादन घटने से पाकिस्तान में अनाज की कमी हो सकती है। पाकिस्तान के सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण ने चिनाब के प्रवाह में कमी के कारण खरीफ की शुरुआत में 21% पानी की कमी की पुष्टि की है।   चिनाब के जल स्तर में लगातार 20% की गिरावट पाकिस्तान की कपास और चावल की फसलों को तबाह कर देगी।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

पाकिस्तान पहले ही पानी के संकट का सामना कर रहा है और सिंधु जल समझौते को निलंबित किए जाने से स्थिति और खराब हो गई है। इस समझौते पर पाकिस्तान की कृषि और हाइड्रोपॉवर परियोजनाएं निर्भर हैं। अगर इन नदियों का पानी पूरी तरह बंद हो गया तो पाकिस्तान के लिए भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं जुटाना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, पाकिस्तान के किसानों और ग्रामीणों की आजीविका भी इस पानी पर निर्भर है, जिससे सामाजिक असंतोष और विरोध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

महंगाई का खतरा

पानी की कमी के कारण फसलों का उत्पादन घटने से पाकिस्तान में खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई और बढ़ेगी। किसानों और ग्रामीण समुदायों में असंतोष बढ़ सकता है, जो देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

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