प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साणंद में माइक्रोन सेमीकंडक्टर फैसिलिटी का शुभारंभ कराया

Edited By Updated: 28 Feb, 2026 09:11 PM

pm modi inaugurates micron semiconductor facility in sanand

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अहमदाबाद के साणंद में माइक्रोन सेमीकंडक्टर फैसिलिटी का शुभारंभ कराते हुए कहा कि 20वीं शताब्दी का रेगुलेटर ऑइल था, जबकि 21वीं शताब्दी का रेगुलेटर माइक्रोचिप बनेगी। उन्होंने कहा कि यह एआई रिवॉल्यूशन की सदी है।...

नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अहमदाबाद के साणंद में माइक्रोन सेमीकंडक्टर फैसिलिटी का शुभारंभ कराते हुए कहा कि 20वीं शताब्दी का रेगुलेटर ऑइल था, जबकि 21वीं शताब्दी का रेगुलेटर माइक्रोचिप बनेगी। उन्होंने कहा कि यह एआई रिवॉल्यूशन की सदी है। समग्र विश्व में भारत आज कैपेबल, कम्पीटिटिव तथा कमिटेड मित्र एवं भागीदार के रूप में उभर रहा है। लगभग 22,516 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट के साथ गुजरात अब देश के ‘सेमीकंडक्टर हब’ के रूप में पहचान स्थापित करेगा।

प्रधानमंत्री ने साणंद से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हुए भारत के भावी उदय का रोडमैप दर्शाते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर के लिए विख्यात भारत अब हार्डवेयर क्षेत्र में भी अपना पहचान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अत्यंत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का हिस्सा बन रहा है। इस अवसर पर मोदी ने समग्र विश्व को विश्वास दिलाते हुए कहा कि इंडिया ईज रेडी, इंडिया ईज रिलायेबल एंड इंडिया डिलीवर्स।

इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव और उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने माइक्रोन टेक्नोलॉजी के अत्याधुनिक एटीएमपी (असेम्बली, टेस्टिंग, मार्किंग तथा पैकेजिंग) प्लांट के कामकाज और अन्य विवरण दर्शाने वाली प्रदर्शनी को देखा तथा प्लांट की मुलाकात लेकर सेमीकंडक्टर चिप के असेम्बली व पैकेजिंग के विभिन्न ऑपरेशन्स के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। नेशनल सेमीकंडक्टर मिशन अंतर्गत माइक्रोन फैसिलिटी द्वारा इस प्लांट का निर्माण किया गया है। 

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इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साणंद जीआईडीसी में आयोजित रोड शो अंतर्गत उपस्थित जनसैलाब का अभिवादन स्वीकार किया। कार्यक्रम में माइक्रोन टेक्नोलॉजी द्वारा डेल टेक्नोलॉजी के प्रथम कॉमर्शियल मेड इन इंडिया शिपमेंट को प्रधानमंत्री की उपस्थिति में हैंडओवर किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी एवं सफल एआई समिट के बाद आज हम टेक्नोलॉजी लीडरशिप क्षेत्र में भारत की कटिबद्धता के एक ऐतिहासिक पड़ाव के साक्षी बने हैं। 10-11 वर्ष पहले तक भारत मे डेटा व चिप की चर्चा केवल सीमित वर्गों में ही होती थी और टेक्नोलॉजी के नाम पर हम केवल आईटी सर्विसेज तक सीमित थे, परंतु आज सॉफ्टवेयर के लिए विख्यात भारत अब हार्डवेयर क्षेत्र में भी अपनी पहचान सशक्त कर रहा है।

उन्होंने प्रोजेक्ट की गतिशीलता पर बल देते हुए इस बात को ध्यान में लिया कि जून-2023 में इस सुविधा के लिए एमओयू हुआ, सितंबर में शिलान्यास हुआ और आज फरवरी-2026 में कॉमर्शियल प्रोडक्शन भी शुरू हो गया है। विश्व के विकसित देशों में भी ऐसी मंजूरियों एवं प्रक्रियाओं में वर्षों निकल जाया करते हैं, परंतु भारत ने यह असंभव कार्य केवल 900 दिनों में पूरा करके बताया है। जब दानत साफ हो और निष्ठा देश के तेज विकास के प्रति हो, तब नीति स्पष्ट बनती है और निर्णयों में भी गति अपने आप आ जाया करती है।

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प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर को इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन तथा एआई रिवॉल्यूशन को जोड़ने वाला सबसे बड़ा सेतु बताया। उन्होंने कहा कि भारत अब इस वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। उन्होंने जोड़ा कि कोविड के मुश्किल समय में बोए गए बीज आज वटवृक्ष बनकर फल दे रहे हैं तथा अब तक सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम अंतर्गत 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमारा लक्ष्य केवल एक फैक्ट्री स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण इकोसिस्टम बनाने का है। भारत अब सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन पर फोकस कर रहा है, जिसमें डिजाइन इंजीनियर से लेकर मशीन निर्माता तथा लॉजिस्टिक्स तक के सभी स्तर शामिल हैं। ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ की घोषणा इसी दिशा में उठाया गया कदम है। जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा, वैसे-वैसे भारत के भीतर ही मटीरियल तथा कम्पोनेंट्स की मांग बढ़ेगी, जो स्थानीय उद्योगों के लिए सबसे बड़ा अवसर सिद्ध होगा।

भारत के बढ़ते जा रहे मार्केट की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स तथा ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारत की मांग निरंतर बढ़ रही है। इसलिए ‘मेक इन इंडिया’ अब फुल स्विंग में आगे बढ़ रहा है। पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन तथा उसके निर्यात में अनेक गुना वृद्धि हुई है। भारत अब कम्पोनेंट से लेकर फिनिश्ड प्रोडक्ट तक सभी कुछ देश में बनाने के लिए सज्ज है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए घरेलू बाजार एवं वैश्विक अवसर; दोनों प्रदान करता है।

साणंद के साथ अपने निजी संस्मरणों को ताजा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि साणंद तो ऐसी धरती है, जो मिट्टी को भी सोना बना देती है। उन्होंने याद किया कि वे यहां एक समय किस तरह साइकिल पर घूमते थे और एक रुपए के एसएमएस से यहाँ रतन टाटा के प्लांट के साथ ऑटोमोबाइल क्रांति की शुरुआत हुई थी। आज वही साणंद ग्लोबल मैप पर सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर रहा है। प्रधानमंत्री ने यहाँ काम करने के लिए आने वाले देश-विदेश के तकनीशियनों को आश्वस्त किया कि गुजरात सरकार उन्हें श्रेष्ठ जीवनशैली तथा सुविधाएँ प्रदान करने में कोई कमी नहीं रखेगी।

पर्यावरण एवं टेक्नोलॉजी के समन्वय के बारे में चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने माइक्रोन के प्लांट की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यहां बनाया गया ‘क्लीन रूम स्पेस’ विश्व के सबसे बड़े स्पेस में एक है। साथ ही; प्लांट में पानी के कम से कम उपयोग तथा रिसाइकलिंग के लिए जो व्यवस्थाएं की गईं हैं, वे प्रगति एवं प्रकृति के तालमेल का श्रेष्ठ उदाहरण हैं। उन्होंने गुजरात सरकार की प्रो-एक्टिव नीतियों की भी सराहना की, जिसके कारण निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

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संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व को मजबूत संदेश देते हुए कहा कि जब भावी पीढ़ियाँ इस दशक को पीछे मुड़कर देखेंगी, तब वे गौरव के साथ कहेंगी कि इस दशक में भारत ने कितनी ऊंची छलांग लगाई थी। यह दशक भारत के टेक फ्यूचर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट सिद्ध होगा। प्रधानमंत्री ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स को आश्वासन दिया कि भारत सरकार तथा राज्य सरकारें उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने साणंद में माइक्रोन प्लांट के लोकार्पण को सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम क्षेत्र में नींव का पत्थर बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज गुजरात ग्लोबल मैप पर ग्रोथ इंजन के रूप में चमका है। साणंद और धोलेरा सेमीकंडक्टर फैसिलिटी प्लांट के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं। प्रधानमंत्री के अथक परिश्रम और राज्य की उद्यमिता के कारण ही लार्ज स्केल और जेट स्पीड से इंडस्ट्रियल ट्रांसफॉर्मेशन संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि यह विकास यात्रा केवल नए उद्योग की शुरुआत ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दुनिया के देशों के लिए एक भरोसेमंद मित्र के रूप में ‘नए भारत’ की पहचान भी है।

मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट की अभूतपूर्व गति और कार्यक्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि जून 2023 में प्रधानमंत्री के वाशिंगटन दौरे के दौरान इस प्रोजेक्ट की घोषणा हुई थी। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन द्वारा 15 जून 2023 को इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के केवल 24 घंटे के भीतर ही गुजरात सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। ऐसी तेजी केवल गुजरात में ही संभव है, क्योंकि हम प्रधानमंत्री द्वारा स्थापित बेंचमार्क और ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर गुजरात’ के मंत्र के साथ काम करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सेमीकंडक्टर चिप्स आज डिजिटल युग की रीढ़ हैं। मोबाइल, ऑटोमोबाइल, डिफेंस, स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे हरेक क्षेत्र में इसकी जरूरत है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए सेमीकंडक्टर मिशन, पीएलआई योजना और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों के चलते भारत दुनिया में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात वर्ष 2022 में  सेमीकंडक्टर पॉलिसी घोषित करने वाला देश का पहला राज्य था। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल, डायमंड और फार्मा जैसे परंपरागत क्षेत्रों में अग्रणी रहने के बाद अब गुजरात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते सेक्टरों में भी ‘ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर’ बनने जा रहा है। माइक्रोन का यह प्लांट न केवल एक औद्योगिक परियोजना है, बल्कि युवाओं के सपनों का इन्वेस्टमेंट भी है। उन्होंने कहा कि गुजरात ‘मेक इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ के मंत्र के साथ विकसित भारत@2047 के संकल्प को साकार करने के लिए कटिबद्ध है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस दिन को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि भारत ने पिछले छह दशकों से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में जो स्वप्न देखा था, वह आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मजबूत संकल्प से साकार हुआ है। केवल 900 दिनों में फाउंडेशन से प्रोडक्शन तक का यह सफर ‘मोदी है, तो मुमकिन है’ के नारे को चरितार्थ करता है।

उन्होंने आगे कहा कि सेमीकंडक्टर एक फाउंडेशनल इंडस्ट्री है। मोबाइल, लैपटॉप या सर्वर; सभी उपकरणों के लिए यह चिप्स अनिवार्य हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पिछले एक दशक में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में छह गुना और निर्यात में आठ गुना वृद्धि हुई है। अब ‘सेमीकंडक्टर 2.0’ के माध्यम से हम केवल चिप डिजाइन ही नहीं; बल्कि उसकी मैन्युफैक्चरिंग, मशीनरी, केमिकल्स और गैस सहित संपूर्ण इकोसिस्टम भारत में ही तैयार करने जा रहे हैं। आज देश की 315 से अधिक यूनिवर्सिटियों के विद्यार्थी चिप डिजाइन कर रहे हैं, जो विकसित भारत की मजबूत नींव की निशानी है।

भारत में यूएस के राजदूत श्री सर्जियो गोर ने इस अवसर को भारत-अमेरिका के मजबूत संबंधों का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह प्लांट केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि अमेरिकन टेक्नोलॉजी और भारतीय मैन्युफैक्चरिंग उत्कृष्टता के समन्वय का भविष्य है। उन्होंने इस अवसर पर अमेरिकी प्रशासन के सहयोग का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी पर जोर दिया।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरा है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की भूमिका अब अनिवार्य बन गई है। गुजरात आज साणंद से लेकर धोलेरा तक, सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स के लिए जो वातावरण प्रदान कर रहा है, वह अन्य देशों और निवेशकों के लिए एक सफल मॉडल है। अमेरिकन कंपनियां गुजरात में मौजूद इन अवसरों को बहुत ही सकारात्मक तरीके से देख रही हैं।

माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सीईओ संजय मेहरोत्रा ने इस दिन को ऐतिहासिक बताते हुए भावुक स्वर में कहा, “यह केवल एक उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि इतिहास का एक अमर क्षण है। दिल्ली के सरदार पटेल विद्यालय में पढ़ाई के दौरान लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के दृढ़ संकल्प से मुझे जो प्रेरणा मिली थी, आज साणंद की इस धरती पर उस संकल्प को साकार होते हुए देख रहा हूं। मुझे विश्वास था कि जो कभी नहीं बना, वह हम बना सकते हैं और आज हमने साणंद में वह कर दिखाया है।” 

उन्होंने भारत को सेमीकंडक्टर मैप पर अंकित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजनरी नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि एआई के युग में डेटा ही हृदय के समान है और डेटा के लिए मेमोरी और स्टोरेज अनिवार्य है। माइक्रोन का यह प्लांट प्रतिवर्ष करोडों की संख्या में चिप का उत्पादन करके वैश्विक जरूरतों को पूरी करेगा। हम यहां केवल उत्पादन ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि 100 फीसदी वाटर री-यूज और सस्टेनेबिलिटी के साथ पर्यावरण का संरक्षण भी कर रहे हैं। भारत की क्षमता पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने गुजराती में गर्व के साथ कहा, “जब लोग पूछते हैं कि क्या भारत में विश्व स्तरीय सेमीकंडक्टर फैसिलिटी बन सकती है?” तब मेरा जवाब होता है, “हां, यह संभव है!”

उल्लेखनीय है कि माइक्रोन के मेगा सेमीकंडक्टर प्लांट में एसएसडी (सॉलिड स्टेट ड्राइव), डीआरएएम और एनएएनडी जैसे आधुनिक स्टोरेज और मेमोरी उपकरणों का निर्माण किया जाएगा। ये उत्पाद विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के युग में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे, क्योंकि मजबूत मेमोरी सपोर्ट के बिना एआई प्रणाली कुशलता से काम नहीं कर सकती। माइक्रोन का यह प्लांट दुनिया के सबसे बड़े और अत्यंत स्वच्छ ‘क्लीन रूम’ वाली इकाइयों में से एक है, जहां ऑपरेशन थियेटर से भी अधिक शुद्ध वातावरण में चिप की पैकेजिंग की जाती है।

रोजगार के क्षेत्र में भी यह प्लांट आशा की एक नई किरण लेकर आया है। वर्तमान में यहां 2000 लोगों की टीम कार्यरत है, जो आगामी समय में बढ़कर 5000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार तक पहुंच जाएगी। विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि इस प्लांट में दिव्यांग नागरिकों को भी ऑपरेटर एवं टेक्नीशियन के रूप में रोजगार के समान अवसर दिए गए हैं।

माइक्रोन के मेगा सेमीकंडक्टर प्लांट के उद्घाटन अवसर पर राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया तथा राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद एवं विधायकों के साथ ही राज्य के मुख्य सचिव एम. के. दास, विज्ञान एवं प्रौद्योगकी विभाग के सचिव पी. भारती सहित अन्य कई महानुभाव मौजूद रहे।

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