Edited By Anu Malhotra,Updated: 12 May, 2026 08:36 AM

Post Office MIS Scheme: डाकघर की मंथली इनकम स्कीम (MIS) एक ऐसी शानदारस्कीम है जिसमें अगर आप पत्नी के साथ मिलकर निवेश करते है तो आपको हर महीने एक अच्छी खासी इनकम मिलने लग जाएगी। बता दें कि यह केंद्र सरकार द्वारा समर्थित सेविंग स्कीम है, जिसमें एक...
Post Office MIS Scheme: डाकघर की मंथली इनकम स्कीम (MIS) एक ऐसी शानदारस्कीम है जिसमें अगर आप पत्नी के साथ मिलकर निवेश करते है तो आपको हर महीने एक अच्छी खासी इनकम मिलने लग जाएगी। बता दें कि यह केंद्र सरकार द्वारा समर्थित सेविंग स्कीम है, जिसमें एक बार निवेश करने पर हर महीने ब्याज के रूप में पक्की इनकम मिलती है। खास बात यह है कि इसमें निवेश की गई रकम भी मैच्योरिटी पर पूरी वापस मिल जाती है।
क्या है पोस्ट ऑफिस MIS स्कीम?
पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम ऐसी योजना है, जिसमें निवेशक एकमुश्त पैसा जमा करता है और बदले में हर महीने ब्याज के रूप में तय रकम प्राप्त करता है। यह योजना उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है जो नियमित मासिक आय चाहते हैं, जैसे रिटायर्ड लोग, गृहिणियां या सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे परिवार। फिलहाल इस स्कीम पर सरकार की ओर से 7.4 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जा रहा है। ब्याज की राशि हर महीने निवेशक के पोस्ट ऑफिस सेविंग अकाउंट में जमा कर दी जाती है।
कितने रुपये से खुल सकता है खाता?
इस स्कीम में कम से कम ₹1,000 से निवेश शुरू किया जा सकता है। वहीं अधिकतम निवेश की सीमा इस प्रकार तय की गई है—
सिंगल अकाउंट: अधिकतम ₹9 लाख
जॉइंट अकाउंट: अधिकतम ₹15 लाख
पति-पत्नी मिलकर जॉइंट अकाउंट खुलवा सकते हैं और ज्यादा रकम निवेश कर सकते हैं।
हर महीने ₹8,633 कैसे मिलेंगे?
अगर पति-पत्नी मिलकर जॉइंट अकाउंट के जरिए इस स्कीम में ₹14 लाख जमा करते हैं, तो मौजूदा 7.4% ब्याज दर के हिसाब से उन्हें हर महीने लगभग ₹8,633 ब्याज मिलेगा। इस तरह निवेशक को हर महीने बिना किसी जोखिम के तय इनकम मिलती रहेगी।
5 साल बाद क्या होगा?
पोस्ट ऑफिस MIS स्कीम की मैच्योरिटी अवधि 5 साल होती है। अवधि पूरी होने पर निवेश की गई पूरी रकम वापस निवेशक के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। चाहें तो मैच्योरिटी के बाद इस रकम को दोबारा किसी अन्य बचत योजना में लगाया जा सकता है।
खाता खुलवाने के लिए क्या जरूरी है?
इस योजना में निवेश करने के लिए आपके पास पोस्ट ऑफिस का सेविंग अकाउंट होना जरूरी है, क्योंकि हर महीने मिलने वाला ब्याज उसी खाते में जमा किया जाता है। अगर सेविंग अकाउंट नहीं है, तो पहले उसे खुलवाना होगा।