Edited By Anu Malhotra,Updated: 22 Jan, 2026 05:04 PM

अक्सर रेल यात्रियों की शिकायत होती है कि वेंडर खाने के मनमाने दाम वसूलते हैं या स्टाफ की पहचान करना मुश्किल होता है। इन दिक्कतों को दूर करने के लिए अब तकनीक और नए लुक का सहारा लिया जा रहा है।
नेशनल डेस्क: अक्सर रेल यात्रियों की शिकायत होती है कि वेंडर खाने के मनमाने दाम वसूलते हैं या स्टाफ की पहचान करना मुश्किल होता है। इन दिक्कतों को दूर करने के लिए अब तकनीक और नए लुक का सहारा लिया जा रहा है।
1. एक स्कैन में खुलेगा खाने का पूरा कच्चा-चिट्ठा
अब आपको वेंडर से खाने की कीमत पूछने की जरूरत नहीं होगी। ट्रेन में मौजूद QR कोड को स्कैन करते ही आपके मोबाइल पर खाने का पूरा मेन्यू और उसकी सही कीमत (Official Rates) आ जाएगी। इससे यात्रियों को पता रहेगा कि उन्हें कितना भुगतान करना है और कोई भी उनसे ज्यादा पैसे नहीं वसूल पाएगा।
2. पेमेंट करना होगा और भी आसान
इस व्यवस्था के तहत डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है। यात्री सीधे उसी इंटरफेस से UPI या कार्ड के जरिए भुगतान कर सकेंगे, जिससे छुट्टे पैसों की चिक-चिक खत्म हो जाएगी।
3. स्टाफ का बदलेगा अंदाज और पहचान
अब रेल कर्मचारी और वेंडर्स नए लुक में नजर आएंगे, जिससे उनकी पहचान आसान होगी:
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वंदे भारत और राजधानी: यहाँ का स्टाफ अब नेवी ब्लू जैकेट में दिखेगा, जिस पर हेल्पलाइन नंबर भी छपा होगा।
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अन्य ट्रेनें: यहाँ के कर्मचारी हल्के नीले रंग की टी-शर्ट पहनेंगे।
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QR आईडी कार्ड: हर वेंडर के पास एक आईडी कार्ड होगा जिस पर QR कोड लगा होगा। इसे स्कैन करके यात्री वेंडर की पूरी जानकारी हासिल कर सकेंगे।
कहां से हो रही है शुरुआत?
यह योजना सबसे पहले मुंबई से चलने वाली प्रीमियम ट्रेनों (जैसे मुंबई-भोपाल रूट) में शुरू की जा रही है। सेंट्रल, वेस्ट सेंट्रल और कोंकण रेलवे मिलकर इसे लागू कर रहे हैं। जल्द ही इसे देश की हर ट्रेन और बड़े स्टेशनों पर भी देखा जा सकेगा।
यात्रियों को क्या होगा बड़ा फायदा?
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धोखाधड़ी पर रोक: खाने के तय रेट पता होने से वेंडर ज्यादा पैसे नहीं ले पाएंगे।
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बेहतर सर्विस: स्टाफ की जवाबदेही बढ़ेगी क्योंकि उनकी पहचान अब डिजिटल रिकॉर्ड में होगी।
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पारदर्शिता: सफर के दौरान मिलने वाली सुविधाओं में अब कुछ भी छिपा नहीं रहेगा।