Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Apr, 2026 12:56 PM

भूपिंदर शाही ने एक पॉडकास्ट पर चर्चा करते हुए बताया कि भारतीय महिलाएं बुद्धिमानी और चालाकी में किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) की एक ऐसी ही महिला अधिकारी का उदाहरण दिया, जिसने अपनी काबिलियत के दम पर पाकिस्तानी अफसरों को हनी...
नेशनल डेस्क: हाल ही में आई फिल्म 'धुरंधर 2' ने देश में जासूसी और सीक्रेट एजेंट्स को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। इस फिल्म में सैन्य सलाहकार की भूमिका निभाने वाले रिटायर्ड कर्नल भूपिंदर शाही ने एक पॉडकास्ट के दौरान युद्ध और जासूसी की दुनिया के उन स्याह पन्नों को पलटा है, जिन्हें सुनकर रूह कांप जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर वह नेतृत्व कर रहे हों, तो कभी भी महिलाओं को सीधे युद्ध के मैदान में भेजने का जोखिम नहीं उठाएंगे।
हनी ट्रैप और जासूसी में भारतीय महिलाओं का दम
भूपिंदर शाही ने एक पॉडकास्ट पर चर्चा करते हुए बताया कि भारतीय महिलाएं बुद्धिमानी और चालाकी में किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) की एक ऐसी ही महिला अधिकारी का उदाहरण दिया, जिसने अपनी काबिलियत के दम पर पाकिस्तानी अफसरों को हनी ट्रैप में फंसाकर देश के लिए बेहद कीमती जानकारियां निकाली थीं। शाही ने गर्व से बताया कि उनकी टीम की एक महिला सदस्य ने दुश्मन के लैपटॉप और सिस्टम में सेंध लगाकर भारी मात्रा में डेटा हासिल करने में सफलता पाई थी।
युद्ध बंदी बनी महिला के साथ कैसा होता है बर्ताव?
जब बात दुश्मन के हाथों पकड़े जाने की आई, तो शाही का स्वर गंभीर हो गया। उन्होंने बताया कि युद्ध की स्थिति में अगर कोई महिला सैनिक या जासूस दुश्मन देश (खासकर कट्टरपंथी विचारधारा वाले देशों) की गिरफ्त में आ जाती है, तो उसके साथ होने वाला व्यवहार अमानवीयता की सारी हदें पार कर देता है। उन्होंने कुवैत में हुए एक प्लेन क्रैश का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि अगर वह महिला पायलट किसी दुश्मन सरजमीं पर गिरी होती, तो क्या होता?
'अगर मैं लीडर होता तो महिलाओं को युद्ध पर न भेजता'
शाही के अनुसार, महिलाएं ड्रोन चलाने, मिसाइल दागने और रणनीति बनाने में पुरुषों से कहीं ज्यादा शार्प हो सकती हैं, लेकिन शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का जो स्तर दुश्मन अपनाता है, वह बेहद घृणित है। उन्होंने बताया कि दुश्मन देश महिला सैनिकों को नग्न करने, उनके वीडियो बनाने और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने जैसी नीच हरकतों पर उतर आते हैं।
उनका मानना है कि दुश्मन के मन में यह ईर्ष्या और गुस्सा और बढ़ जाता है कि एक महिला ने उन पर हमला करने की हिम्मत कैसे की। इसी संभावित अपमान और भयावह टॉर्चर से बचाने के लिए वे महिलाओं को सीधे युद्ध की फ्रंटलाइन पर भेजने के पक्ष में नजर नहीं आए। शाही ने साफ किया कि भारतीय सेना ने पहले भी अपने जवानों के साथ होने वाली क्रूरता को झेला है, और वे नहीं चाहते कि देश की बेटियां उस नर्क से गुजरें।