Edited By Sanjeev,Updated: 30 Oct, 2026 11:03 AM

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई 280 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले से जुड़ी है। आरोप है कि झारखंड के एक पावर प्लांट से जुड़ी रकम को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए कोलकाता भेजा गया था। ED की नजर...
कोलकाता : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई 280 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले से जुड़ी है। आरोप है कि झारखंड के एक पावर प्लांट से जुड़ी रकम को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए कोलकाता भेजा गया था। ED की नजर उत्तरी कोलकाता के लेक टाउन इलाके में रहने वाले एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) पर पड़ी, जिस पर फर्जी कंपनियां (शेल कंपनियां) बनाने और करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप है।
कोलकाता के अलावा हुगली जिले के उत्तरपारा, पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल और हावड़ा में भी छापेमारी चल रही है। आज सुबह ED के अधिकारी उत्तरपारा की शिबतला स्ट्रीट में रहने वाले सुदीप्तो घोष के घर पहुंचे। ED की जांच टीम के साथ केंद्रीय बलों के जवान भी मौजूद थे। सुदीप्तो घोष पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। उनके परिवार से पूछताछ की जा रही है और उनके घर की तलाशी ली जा रही है।
घोष का कहना है कि उनका इस भ्रष्टाचार के मामले से कोई लेना-देना नहीं है। जांचकर्ताओं ने जांच के लिए अनुमति ले ली है और घोष केंद्रीय जांच एजेंसी के साथ सहयोग कर रहे हैं। ED के अधिकारियों ने लेक टाउन के पॉश इलाके 'अवनी ऑक्सफोर्ड (फेज 1)' हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) अशोक सारथी के घर पर भी छापेमारी की। वहां सुबह से ही केंद्रीय बलों की कड़ी सुरक्षा के बीच सघन तलाशी और पूछताछ चल रही थी।
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार यह छापेमारी झारखंड में पावर प्रोजेक्ट या पावर प्लांट बनाने के नाम पर बैंक से ली गई रकम में हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत की जा रही है। जांच के दायरे में आई मुख्य निजी कंपनी का नाम 'कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड' (KPPL) है। आरोप है कि इस CA ने झारखंड में 66 MW का पावर प्लांट लगाने के बहाने बैंक से लोन लिया था। बैंक कंसोर्टियम (बैंकों के समूह) से लिए गए इस लोन की रकम लगभग 280 करोड़ रुपए थी।
आरोप है कि पावर प्लांट बनाने के नाम पर ली गई इस रकम का इस्तेमाल प्रोजेक्ट के लिए नहीं किया गया, बल्कि फर्जी कंपनियों (शेल कंपनियों) के एक जाल के जरिए इसे हड़प लिया गया। अधिकारियों का मानना है कि इस वित्तीय घोटाले में चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक सारथी की अहम भूमिका है। फिलहाल ED के अधिकारी चार्टर्ड अकाउंटेंट से उनके आवास पर पूछताछ करने के साथ-साथ डिजिटल दस्तावेजों, बैंक खातों और कई संदिग्ध कागजातों की तलाश कर रहे हैं। अब यह देखना बाकी है कि जांच पूरी होने पर और क्या-क्या जानकारी सामने आती है।
ED के अनुसार यह जांच 'सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस' (SFIO) द्वारा कोलकाता की दूसरी विशेष अदालत में दर्ज कराई गई एक शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी। यह शिकायत 'कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड' (KPPL) और अन्य कंपनियों के कामकाज से जुड़ी थी। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने कंपनी के कामकाज की जांच के आदेश दिए थे। यह कदम 'इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया' (IBBI) द्वारा उन कंपनियों की एक सूची सौंपे जाने के बाद उठाया गया जिनके मामले में 'रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल' (RP) ने NCLT के समक्ष 'अवॉयडेंस ट्रांजैक्शन' (लेन-देन से बचने या हेरफेर करने) से जुड़ी याचिकाएं दायर की थीं।