Edited By Sanjeev,Updated: 31 Oct, 2026 12:59 PM

अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महाराष्ट्र के नागपुर में दो जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान 1.95 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त की गई और 40 लाख रुपए से ज्यादा की बैंक बैलेंस राशि को फ्रीज कर दिया गया। ED के एक बयान के...
नागपुर : अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महाराष्ट्र के नागपुर में दो जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान 1.95 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त की गई और 40 लाख रुपए से ज्यादा की बैंक बैलेंस राशि को फ्रीज कर दिया गया। ED के एक बयान के अनुसार, 'प्रयाग डेवलपर्स एंड बिल्डर्स' के मालिक शशांक गोविंद प्रसाद पांडे से जुड़ी नागपुर की दो जगहों पर 26 अक्टूबर को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत तलाशी अभियान चलाया गया।
अधिकारियों ने बताया, 'तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज/रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए। इसके अलावा 1.95 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त की गई और 40 लाख रुपए से ज्यादा की बैंक बैलेंस राशि को फ्रीज कर दिया गया। साथ ही करोड़ों रुपए की कई अचल संपत्तियों (immovable properties) का भी पता चला है जिनके बारे में शक है कि इन्हें अपराध से हासिल की गई रकम (proceeds of crime) से खरीदा गया था।'
अधिकारियों के मुताबिक ED ने यह जांच नागपुर शहर के अजनी पुलिस स्टेशन और राणाप्रताप नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 418 और 420 के तहत दर्ज किया गया था। अधिकारियों ने कहा, 'जांच से पता चला है कि शशांक गोविंद प्रसाद पांडे कई तरह की धोखाधड़ी में शामिल है, जिससे कई निर्दोष लोगों को भारी नुकसान हुआ है।'
उन्होंने बताया कि एक मामले में पांडे ने एक बुजुर्ग विधवा महिला की जमीन के लिए एक डेवलपमेंट एग्रीमेंट किया था। इस समझौते के तहत उसे महिला को 1.75 करोड़ रुपए देने थे और 14 आवासीय फ्लैट देने थे। अधिकारियों ने बताया, 'हालांकि एक 'डिक्लेरेशन-कम-करेक्शन डीड' (घोषणा-सह-सुधार विलेख) के जरिए ये फ्लैट महिला के नाम कर दिए गए थे, लेकिन आरोपी ने महिला की जानकारी या सहमति के बिना ही धोखाधड़ी से इस डीड को रद्द कर दिया और बाद में उन फ्लैट्स को किसी तीसरे पक्ष को बेच दिया।'
उन्होंने बताया कि बिक्री से प्राप्त 8.93 करोड़ रुपए की रकम का दुरुपयोग किया गया और उसे आरोपी ने अपने निजी फायदे के लिए निकाल लिया। इसके अलावा डेवलपमेंट एग्रीमेंट के तहत देय 45 लाख रुपए की राशि भी रोक ली गई जिससे शिकायतकर्ता को कुल 9.4 करोड़ रुपए का अनुचित नुकसान हुआ। 'दिव्य प्रयाग अपार्टमेंट' प्रोजेक्ट से जुड़े एक अन्य मामले में ED अधिकारियों ने बताया कि जांच से पता चला है कि 22 फ्लैटों को 'दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड' (DHFL) के पास गिरवी रखकर 22 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट लोन लिया गया था जिसमें से 11 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए गए थे।
उन्होंने कहा, 'पांडे ने कर्ज देने वाली संस्था से जरूरी 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) लिए बिना और खरीदारों को यह बताए बिना कि फ्लैट पहले से गिरवी रखे गए हैं, उन्हें बेच दिया। आरोप है कि उसने होम लोन के सिलसिले में बैंक को एक झूठा हलफनामा भी दिया जिसमें उसने फ्लैटों के पहले से गिरवी होने की बात छिपाई।' ED के अनुसार इसके बाद 12.84 करोड़ रुपए की बकाया राशि सामने आई और SARFAESI (सरफेसी) एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों ने कहा, 'माना जा रहा है कि तथ्यों को छिपाने और गलत जानकारी देने की वजह से फ्लैट खरीदारों को अनुचित नुकसान हुआ, जबकि आरोपी को अनुचित लाभ मिला।'