Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Nov, 2026 03:22 PM

भारत ने बुनियादी ढांचे और रेलवे तकनीक के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। देश की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन अब पूरी तरह से 'मेड-इन-इंडिया' अवतार में पटरी पर उतरने के लिए तैयार हो रही है।
नई दिल्ली: भारत ने बुनियादी ढांचे और रेलवे तकनीक के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। देश की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन अब पूरी तरह से 'मेड-इन-इंडिया' अवतार में पटरी पर उतरने के लिए तैयार हो रही है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर के लिए तैयार की जा रही इस ट्रेन को भारतीय इंजीनियरों ने देश की मौसम स्थितियों और भौगोलिक जरूरतों को ध्यान में रखकर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से डिजाइन किया है। फिलहाल, इस बुलेट ट्रेन का निर्माण बेंगलुरु स्थित भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) की इकाई में तेज़ी से चल रहा है।
रफ्तार और ट्रेन का ढांचा
इस बुलेट ट्रेन की टेस्ट स्पीड 280 किमी प्रति घंटा होगी, जबकि इसे 249 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति (ऑपरेशनल स्पीड) पर चलाया जाएगा। 202 मीटर लंबी इस ट्रेन में कुल 8 कोच होंगे (4 मोटर कारें और 4 ट्रेलर कारें)। आवश्यकता पड़ने पर 8-8 कोच की दो ट्रेनों को आपस में जोड़कर 16 कोच की एक लंबी ट्रेन बनाई जा सकती है। ट्रेन के दोनों सिरों पर इंटेलिजेंट ऑन-बोर्ड कंट्रोल सिस्टम से लैस ड्राइवर केबिन होंगे, जो सीधे ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर से जुड़े रहेंगे।

पैसेंजर कैपेसिटी और सिटिंग अरेंजमेंट
इस 8-कोच वाली ट्रेन में कुल 557 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगे।
एग्जीक्यूटिव-क्लास कोच (1 कोच): प्रीमियम अनुभव के लिए इसमें 2x2 सीटिंग अरेंजमेंट दिया गया है।
स्टैंडर्ड-क्लास कोच (7 कोच): इसमें 3x2 की बैठने की व्यवस्था की गई है। कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए अलग से आरक्षित सीटें और आसान 'लेवल बोर्डिंग' की सुविधा दी गई है।
यात्रियों की सुविधा और आराम
भारतीय यात्रियों की शारीरिक बनावट और जरूरतों के हिसाब से इसके इंटीरियर को डिजाइन किया गया है, सफर के दौरान यात्रियों को बेहतर लेगरूम मिलेगा। साथ ही हर सीट रो के पास बाहरी नजारों का आनंद लेने के लिए बड़ी शीशे की खिड़कियां लगाई गई हैं। कोचों के बीच सीलबंद 'गैंगवे' (Sealed Gangway) दिया गया है, जिससे यात्री बिना किसी परेशानी के एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे में जा सकते हैं।
चार्जिंग और लगेज स्पेस
हर सीट के पास मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट होंगे। भारी सामान के लिए फर्श पर स्टैंड और सिर के ऊपर रैक की सुविधा है। पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए ट्रेन में आधुनिक इको-फ्रेंडली बायो-डाइजेस्टर शौचालय लगाए गए हैं।
इंफोटेनमेंट और सुरक्षा प्रणाली
ट्रेन के अंदर LCD डिस्प्ले लगे होंगे, जो हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में यात्रा से जुड़ी जानकारी देंगे। सफर के दौरान मनोरंजन के लिए प्री-लोडेड इंफोटेनमेंट के साथ हाई-स्पीड वाई-फाई की सुविधा मिलेगी। किसी भी आपातकालीन स्थिति में सीधे ट्रेन क्रू से संपर्क करने के लिए कोच और वेस्टिब्यूल एरिया में इमरजेंसी बटन/टॉक-बैक सिस्टम दिया गया है।
साउंड इंसुलेशन
ट्रेन के अंदर बाहरी शोर न आए, इसके लिए नॉइज़-डैम्पिंग कोटिंग और साउंड इंसुलेशन का उपयोग किया गया है।हर कोच में 'डुअल-यूनिट HVAC सिस्टम' लगा है, जो पूरे साल सही तापमान और नमी बनाए रखेगा। ट्रेन में ऊर्जा की बचत के लिए 'स्मार्ट रीजेनरेटिव ब्रेकिंग' दी गई है। जब ब्रेक लगाए जाएंगे, तो उत्पन्न ऊर्जा वापस इलेक्ट्रिकल ग्रिड में चली जाएगी। ट्रेन पूरी तरह से 25 kV AC इलेक्ट्रिक पावर पर चलेगी। सुरंगों से गुजरते समय तेज़ आवाज़ न हो और हवा का दबाव कम से कम रहे, इसके लिए ट्रेन के नोज़ (आगे के हिस्से) और बॉडी को खास कंप्यूटर सिमुलेशन के ज़रिए डिज़ाइन किया गया है।