Edited By Parveen Kumar,Updated: 11 Jan, 2026 05:29 PM

उत्तर भारत में ठंड और घने कोहरे का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। खराब मौसम का सीधा असर जनजीवन के साथ-साथ स्कूली बच्चों पर भी पड़ रहा है। छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए कई राज्यों में स्कूलों की शीतकालीन छुट्टियां बढ़ाने का फैसला किया गया है।
नेशनल डेस्क: उत्तर भारत में ठंड और घने कोहरे का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। खराब मौसम का सीधा असर जनजीवन के साथ-साथ स्कूली बच्चों पर भी पड़ रहा है। छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए कई राज्यों में स्कूलों की शीतकालीन छुट्टियां बढ़ाने का फैसला किया गया है।
दिल्ली में 15 जनवरी तक स्कूल बंद
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सभी स्कूल 15 जनवरी तक बंद रहेंगे। इस संबंध में दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। यह शीतकालीन अवकाश 1 जनवरी से शुरू हुआ था और 2025–26 के शैक्षणिक कैलेंडर का हिस्सा है। शिक्षा विभाग का कहना है कि जनवरी की शुरुआत में पड़ने वाली भीषण ठंड, घना कोहरा और कम दृश्यता बच्चों के लिए जोखिम भरी हो सकती है, खासकर सुबह के समय।
यूपी में भी बढ़ी छुट्टियां
उत्तर प्रदेश में भी शीतलहर के चलते कई जिलों में स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। आगरा में सभी स्कूल 12 जनवरी तक बंद रहेंगे। वहीं गौतमबुद्ध नगर में कक्षा 8 तक के स्कूलों को 15 जनवरी तक बंद रखने का फैसला लिया गया है। पहले ये छुट्टियां 10 जनवरी तक तय थीं, लेकिन मौसम को देखते हुए इन्हें आगे बढ़ा दिया गया।
हरियाणा में 15 जनवरी तक अवकाश
हरियाणा के स्कूल शिक्षा निदेशालय ने साफ किया है कि राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 15 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। स्कूलों में नियमित पढ़ाई 16 जनवरी से दोबारा शुरू होगी।
पंजाब में 13 जनवरी तक स्कूल बंद
पंजाब में भी ठंड और घने कोहरे की मार को देखते हुए सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूल 13 जनवरी तक बंद रहेंगे। इसके बाद 14 जनवरी से कक्षाएं फिर से शुरू होंगी।
तेलंगाना में संक्रांति की छुट्टियां बढ़ीं
तेलंगाना में कनुमा को वैकल्पिक अवकाश घोषित किए जाने के बाद संक्रांति की छुट्टियों को 16 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। प्रदेश के स्कूल 17 जनवरी, 2026 से दोबारा खुलेंगे। लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। ऐसे में अभिभावकों के लिए भी जरूरी है कि वे स्थानीय प्रशासन और स्कूलों की ओर से जारी निर्देशों पर नजर बनाए रखें।