Edited By Anu Malhotra,Updated: 26 Mar, 2026 01:47 PM

Share Market: शेयर बाजार के खिलाड़ियों के लिए नए वित्त वर्ष की शुरुआत जेब पर भारी पड़ने वाली है। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) के जरिए रातों-रात मुनाफा कमाने का सपना देखते हैं, तो अपनी रणनीति बदल लीजिए। सरकार ने...
Share Market: शेयर बाजार के खिलाड़ियों के लिए नए वित्त वर्ष की शुरुआत जेब पर भारी पड़ने वाली है। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) के जरिए रातों-रात मुनाफा कमाने का सपना देखते हैं, तो अपनी रणनीति बदल लीजिए। सरकार ने सट्टेबाजी की बढ़ती लत को नियंत्रित करने के लिए सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की दरों में बड़ा इजाफा करने का फैसला किया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में पेश किए गए ये बदलाव आगामी 1 अप्रैल से देशभर के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर नजर आने लगेंगे।
क्यों कड़वी की गई मुनाफे की घूंट?
सरकार के इस सख्त कदम के पीछे का मकसद कोई राजस्व वसूलना मात्र नहीं, बल्कि छोटे निवेशकों को "बर्बाद" होने से बचाना है। दरअसल, बाजार नियामक सेबी (SEBI) के आंकड़े बताते हैं कि डेरिवेटिव सेगमेंट में हाथ आजमाने वाले 10 में से 9 निवेशकों को सिर्फ घाटा ही हाथ लगता है। इसी बढ़ते जोखिम और सट्टेबाजी की प्रवृत्ति को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने टैक्स की दीवार ऊंची कर दी है। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक, भारी-भरकम ट्रेडिंग वॉल्यूम को देखते हुए यह मामूली बढ़ोत्तरी जरूरी थी ताकि मार्केट में स्थिरता बनी रहे और लोग अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई सट्टे में न गंवाएं।
अब आपकी जेब पर कितना होगा असर?
1 अप्रैल से लागू होने वाली नई दरों के तहत, फ्यूचर्स सेगमेंट में होने वाली खरीद-बिक्री पर लगने वाला टैक्स अब 0.02 प्रतिशत से बढ़कर सीधा 0.05 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं, ऑप्शंस की बात करें तो प्रीमियम पर लगने वाला शुल्क और एक्सरसाइज टैक्स भी 0.15 प्रतिशत की नई ऊंचाई को छू लेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि अब हर एक ट्रेड के लिए आपको पहले के मुकाबले ढाई गुना तक ज्यादा टैक्स चुकाना होगा, जो अंततः आपके कुल मुनाफे को कम कर देगा।
बाजार की चाल और विशेषज्ञों की राय
एक तरफ जहां टैक्स बढ़ने का शोर है, वहीं दूसरी ओर बाजार की हालिया रफ्तार ने सबको चौंकाया है। पिछले सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही बढ़त के साथ बंद हुए, लेकिन एक्सपर्ट्स की चेतावनी भी हवा में तैर रही है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स जैसे संस्थानों का मानना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए सकारात्मक हो सकता है जो सीधे शेयरों (इक्विटी) में निवेश करते हैं, क्योंकि अब लोग रिस्की ऑप्शंस को छोड़कर सुरक्षित निवेश की तरफ मुड़ सकते हैं। हालांकि, रुपया और निफ्टी की भविष्य की चाल को लेकर अब भी बाजार में कयासों का दौर जारी है।