BJP के वरिष्ठ नेता डॉ. गोपालराव पाटिल का निधन, 94 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Edited By Updated: 21 Apr, 2026 11:57 PM

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. गोपालराव पाटिल का मंगलवार सुबह लातूर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे और पिछले पंद्रह दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे।

नेशनल डेस्कः भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. गोपालराव पाटिल का मंगलवार सुबह लातूर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे और पिछले पंद्रह दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका गैलेक्सी अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार की शाम 5 बजे लातूर के संत तुकाराम नेशनल मॉडल स्कूल के मैदान में किया गया। डॉ. पाटिल के परिवार में पत्नी शांताबाई पाटिल, एक बेटे और तीन बेटियां हैं। उनके बेटे सच्चिदानंद अमेरिका में आईटी सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनकी बेटियां अलग-अलग पेशेवर क्षेत्रों में काम कर रही हैं।

डॉ. पाटिल का जन्म धाराशिव (पूर्व में उस्मानाबाद) जिले के उमरगा तालुका के कवठा गांव में 3 अक्टूबर, 1931 को हुआ। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की और एमबीबीएस तथा डीसीएच की डिग्रियां हासिल कीं। उन्होंने कई वर्षों तक लातूर में एक सम्मानित बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में सेवा की और बच्चों के स्वास्थ्य देखभाल के प्रति अपने समर्पण के लिए वे व्यापक रूप से जाने जाते थे। उन्होंने शिव छत्रपति शिक्षण संस्था के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और इंडियन पीडियाट्रिक एसोसिएशन की एक शाखा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके वे पहले अध्यक्ष थे। उन्होंने इन वर्षों के दौरान कई राष्ट्रीय स्तर के चिकित्सा सम्मेलनों में भाग लिया और 1998 में उन्हें‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर सांसद'पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

डॉ. पाटिल ने 1994 से 2000 तक राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया, जिस दौरान उन्होंने वाणिज्य, विदेश मामले और रेलवे सहित कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में योगदान दिया। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल चाकुरकर के खिलाफ लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। अपनी बौद्धिक अभिरुचियों के लिए जाने जाने वाले डॉ. पाटिल को पढ़ने, यात्रा करने और गजलों में गहरी रुचि थी। वह मराठी, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत और फ्रेंच सहित कई भाषाओं में पारंगत थे। 

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