मेरे विरूद्ध बलात्कार की शिकायत ‘फर्जी' एवं ‘दुर्भावनापूर्ण': सुप्रीम कोर्ट से बोले शाहनवाज हुसैन

Edited By Updated: 12 Oct, 2022 09:02 PM

shahnawaz hussain told the supreme court

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन ने अपने विरूद्ध लगे बलात्कार के आरोप का बुधवार को उच्चतम न्यायालय में कड़ा विरोध किया और इससे संबंधित शिकायत को ‘फर्जी' एवं ‘दुर्भावनापूर्ण' करार दिया।

नेशनल डेस्क: भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन ने अपने विरूद्ध लगे बलात्कार के आरोप का बुधवार को उच्चतम न्यायालय में कड़ा विरोध किया और इससे संबंधित शिकायत को ‘फर्जी' एवं ‘दुर्भावनापूर्ण' करार दिया। हुसैन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने प्रधान न्यायाधीश यू यू ललित के नेतृत्व वाली पीठ से कहा कि यह शिकायत एक नामचीन व्यक्ति के विरूद्ध (कानून के) ‘दुरूपयोग का बड़ा मामला' है। उन्होंने भाजपा नेता के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर आपत्ति जताई।

न्यायमूर्ति ललित, न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति एस आर भट की पीठ ने कहा कि यदि शिकायत है और जांच की अनुमति नहीं दी जाती है तो मामला आगे बढ़ेगा कैसे। रोहतगी ने दलील दी कि कानून ऐसा नहीं है कि शिकायत दर्ज करने के साथ प्राथमिकी दर्ज की ही जाए। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय इस दिशा में आगे बढा कि यदि कोई आरोप लगाता है तो प्राथमिकी दर्ज की ही जानी चाहिए। उन्होंने अपराध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 157 का हवाला दिया जिसका संबंध जांच की प्रक्रिया से है।

उन्होंने शिकायत के बारे में कहा, ‘‘ यह पूरी तरह फर्जी है...... यह दुर्भावनापूर्ण है।'' इस पर अदालत ने कहा, ‘‘यदि कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि से आता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य को शिकायत दर्ज कराने का अधिकार नहीं है। मामले की जांच होने दी जाए।'' इस मामले की अगली सुनवाई अब 18 नवंबर को होगी। इससे पहले शीर्ष अदालत ने 19 सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के विरूद्ध हुसैन की अपील पर सुनवाई 23 सितंबर के लिए टाल दी थी।

शीर्ष अदालत ने 22 अगस्त को उच्च न्यायालय के आदेश के क्रियान्वयन पर स्थगन लगा दिया था। उच्च न्यायालय ने 17 अगस्त को हुसैन की अर्जी खारिज कर दी थी जिसमें भाजपा नेता के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गयी थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि 2018 के आदेश में दुराग्रह जैसा कुछ नहीं है। वर्ष 2018 में दिल्ली की एक महिला कथित बलात्कार के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर निचली अदालत पहुंची थी। हुसैन ने इस आरोप से इनकार किया है। 

 

 

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