Edited By Anu Malhotra,Updated: 24 Feb, 2026 02:12 PM

भारतीय रेलवे को देश की रगों में दौड़ने वाला खून कहा जाता है, जो हर दिन करोड़ों जिंदगियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती है। लेकिन इस लंबी यात्रा में अक्सर एक छोटी सी लोहे की चेन और 'मिडल बर्थ' को लेकर यात्रियों के बीच युद्ध छिड़ जाता है। कोई जल्दी सोना...
नेशनल डेस्क: भारतीय रेलवे को देश की रगों में दौड़ने वाला खून कहा जाता है, जो हर दिन करोड़ों जिंदगियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाती है। लेकिन इस लंबी यात्रा में अक्सर एक छोटी सी लोहे की चेन और 'मिडल बर्थ' को लेकर यात्रियों के बीच युद्ध छिड़ जाता है। कोई जल्दी सोना चाहता है, तो कोई देर तक बैठकर गप्पें मारना चाहता है। इस खींचतान को खत्म करने के लिए रेलवे ने कुछ बेहद स्पष्ट कायदे बनाए हैं, ताकि आपकी यात्रा बहस में नहीं बल्कि सुकून में बीते।
रेलवे के आधिकारिक प्रोटोकॉल के अनुसार, Sliper और AC Coach में सोने के लिए एक खास वक्त मुकर्रर किया गया है। नियम कहता है कि रात के 10 बजे से लेकर सुबह के 6 बजे तक का समय सोने के लिए रिजर्व है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपके पास मिडिल बर्थ का टिकट है, तो आप रात 10 बजते ही अपनी बर्थ खोल सकते हैं। इस दौरान लोअर बर्थ पर बैठा यात्री आपको टोक नहीं सकता और न ही उसे मना करने का कानूनी हक है।
अक्सर देखा जाता है कि मिडिल बर्थ वाले यात्री शाम होते ही अपनी सीट नीचे गिरा देते हैं, जिससे नीचे बैठे लोगों को सिर झुकाकर बैठना पड़ता है। नियम के मुताबिक, सुबह 6 बजते ही मिडिल बर्थ को वापस समेटना अनिवार्य है ताकि नीचे की सीट पर सभी यात्री मिलकर बैठ सकें। अगर कोई मुसाफिर तय समय से पहले जबरन सीट खोलता है या सुबह होने के बाद भी कब्जा जमाए रखता है, तो आप इसकी शिकायत टीटीई (TTE) से कर सकते हैं। इन छोटे लेकिन जरूरी नियमों का पालन न केवल विवादों को टालता है, बल्कि सह-यात्रियों के साथ आपके सफर को भी यादगार बनाता है।