Edited By Anu Malhotra,Updated: 05 Jan, 2026 09:19 AM

भारत में 20 से 40 साल के स्वस्थ दिखने वाले युवाओं की अचानक मौतें लोगों में भय पैदा कर रही हैं। क्या इसका संबंध कोविड वैक्सीन से है? AIIMS की ताजा रिसर्च ने इस सवाल का जवाब दिया है। अध्ययन में खुलासा हुआ है कि अचानक मौतों का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग...
नई दिल्ली: भारत में 20 से 40 साल के स्वस्थ दिखने वाले युवाओं की अचानक मौतें लोगों में भय पैदा कर रही हैं। क्या इसका संबंध कोविड वैक्सीन से है? AIIMS की ताजा रिसर्च ने इस सवाल का जवाब दिया है। अध्ययन में खुलासा हुआ है कि अचानक मौतों का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग है, न कि कोविड वैक्सीन। कई युवाओं की हृदय धमनियों में 70% से अधिक रुकावट पाई गई, जबकि अधिकांश ने कभी समय पर दिल की जांच या इलाज नहीं करवाया था।
दरअसल, पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया पर ऐसे विचलित करने वाले वीडियो की बाढ़ आ गई है, जहां कोई युवक जिम में कसरत करते, शादी में थिरकते या चलते-फिरते अचानक जमीन पर गिरता है और दम तोड़ देता है। जिसे हम 'किस्मत का खेल' या 'अनजानी मौत' समझ रहे थे, उसके पीछे के कड़वे सच को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की ताजा रिसर्च ने उजागर कर दिया है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में छपी यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि भारतीय युवाओं के शरीर में बीमारियां 'चुपचाप' घर कर रही हैं, जो बिना किसी दस्तक के जान ले रही हैं।
युवाओं पर सबसे ज्यादा प्रहार: चौंकाने वाले आंकड़े
AIIMS के फॉरेंसिक और पैथोलॉजी विशेषज्ञों ने मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच हुए 2,214 पोस्टमॉर्टम का गहराई से विश्लेषण किया। इस अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि मौत अब उम्र की मोहताज नहीं रही:
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युवा आबादी निशाने पर: कुल आकस्मिक मौतों में से 57.2% मामले 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के थे।
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भ्रम और हकीकत: ज्यादातर परिवारों का मानना था कि मृतक पूरी तरह फिट था, लेकिन मेडिकल जांच ने अंदरूनी बीमारियों की पोल खोल दी।
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हृदय रोग सबसे बड़ा दुश्मन: लगभग 42.6% मौतों की जड़ दिल की बीमारियां निकलीं। हैरान करने वाली बात यह है कि कई युवाओं की धमनियों में 70% से अधिक ब्लॉकेज पाया गया, जिससे वे खुद भी अनजान थे।
रहस्यमयी मौतें: जब विज्ञान भी रह गया निरुत्तर
इस रिसर्च का एक डराने वाला पहलू 'नेगेटिव ऑटोप्सी' है। हर पांचवें मामले (21.3%) में डॉक्टरों को शरीर के अंगों में कोई खराबी नहीं मिली। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये मौतें हृदय की विद्युत तरंगों (रिदम) में अचानक आए बिगाड़ के कारण हुईं, जो मौत के बाद शरीर पर कोई निशान नहीं छोड़तीं।
इसके अलावा, मौतों के अन्य कारणों में शामिल हैं:
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श्वसन रोग: 21.3% मौतें निमोनिया और टीबी जैसी फेफड़ों की बीमारियों से हुईं।
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नशा और लापरवाही: शराब के नशे में नींद के दौरान उल्टी का गले में फंसना भी मौत की वजह बना।
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स्त्री रोग: महिलाओं में इंटरनल ब्लीडिंग और प्रेग्नेंसी से जुड़ी जटिलताएं जानलेवा साबित हुईं।
Covid वैक्सीन का डर महज एक अफवाह?
अक्सर सोशल मीडिया पर इन मौतों को कोविड वैक्सीन से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, एम्स की इस रिसर्च ने स्पष्ट किया है कि टीकाकरण और अचानक होने वाली मौतों के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं मिला है। असल समस्या शरीर के भीतर बिना लक्षणों के पनप रही बीमारियां और जेनेटिक कारण हैं।
कब और कहां मंडराता है खतरा?
रिपोर्ट के अनुसार, जान जाने का जोखिम किसी खास जगह तक सीमित नहीं है:
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55% से अधिक मौतें घर के सुरक्षित माहौल में हुईं।
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30% मामले यात्रा के दौरान सामने आए।
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40% मौतें रात के सन्नाटे या तड़के सुबह दर्ज की गईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि 'फिट' दिखने और 'स्वस्थ' होने में अंतर है। नियमित हार्ट चेकअप, नशीले पदार्थों से दूरी और परिवार की मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी ही इस साइलेंट किलर से बचने का एकमात्र रास्ता है।