Import Duty Cut: पेट्रोकेमिकल की 41 चीजों पर import duty खत्म, जानें क्‍या-क्‍या सस्‍ता होगा? चेक करें पूरी ल‍िस्‍ट

Edited By Updated: 02 Apr, 2026 02:58 PM

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नेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया (Middle East) के सुलगते हालात और ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने दुनियाभर के बाजार में आग लगा दी है। जब स्ट्रैट ऑफ होर्मुज जैसे समुद्री रास्तों पर जहाजों के पहिए थमे, तो कच्चे तेल की कीमतों ने 122 डॉलर प्रति बैरल का...

नेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया (Middle East) के सुलगते हालात और ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने दुनियाभर के बाजार में आग लगा दी है। जब स्ट्रैट ऑफ होर्मुज जैसे समुद्री रास्तों पर जहाजों के पहिए थमे, तो कच्चे तेल की कीमतों ने 122 डॉलर प्रति बैरल का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया। इसका सीधा असर भारत की जेब पर पड़ना तय था, क्योंकि हम अपनी जरूरतों का 85% तेल बाहर से मंगाते हैं। लेकिन इस वैश्विक संकट के बीच केंद्र सरकार ने आम आदमी को महंगाई के करंट से बचाने के लिए एक बड़ा 'सुरक्षा कवच' तैयार किया है।

पेट्रोकेमिकल की 41 चीजों पर टैक्स खत्म

सरकार ने एक मास्टरस्ट्रोक चलते हुए प्लास्टिक, दवा, कपड़े और ऑटोमोबाइल सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले 41 मुख्य पेट्रोकेमिकल इनपुट्स पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी (सीमा शुल्क) को पूरी तरह हटा दिया है। वित्त मंत्रालय का यह फैसला 2 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है और 30 जून 2026 तक जारी रहेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनियां अब विदेशों से कच्चा माल बिना टैक्स दिए मंगा सकेंगी, जिससे सामान बनाने की लागत कम होगी और बाजार में कीमतें स्थिर रहेंगी।

आपकी रसोई से लेकर कार तक को राहत

यह सिर्फ एक टैक्स कटौती नहीं है, बल्कि आपके रोजमर्रा के सामानों को सस्ता रखने की कोशिश है। जिन चीजों पर ड्यूटी हटाई गई है, उनमें मेथेनॉल, स्टाइरीन, और पीवीसी (PVC) जैसे नाम शामिल हैं।

  • किचन और शॉपिंग: दूध की बोतलें, जूस के पैक, शॉपिंग बैग, डिस्पोजेबल प्लेट और फूड कंटेनर बनाने वाली कंपनियों को अब कच्चा माल सस्ता मिलेगा।

  • घर और गैजेट्स: पेंट, गोंद, टीवी और कंप्यूटर के बॉडी पार्ट्स, और यहां तक कि बच्चों के खिलौने बनाने वाली इंडस्ट्री को भारी राहत मिलेगी।

  • हेल्थ और टेक्सटाइल: दवाइयों की मैन्युफैक्चरिंग, ब्लड बैग, मेडिकल ट्यूबिंग और हमारे कपड़ों में इस्तेमाल होने वाले फाइबर की लागत भी अब कम हो जाएगी।

तेल के खेल में सरकार का कड़ा रुख

कच्चे तेल की सप्लाई चेन टूटने से प्राइवेट कंपनियों ने दाम बढ़ाना शुरू कर दिया था। इस बोझ को जनता के कंधों से उतारने के लिए सरकार ने पहले ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की भारी कटौती कर दी थी। इतना ही नहीं, देश में तेल की कमी न हो, इसके लिए डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के निर्यात पर भारी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा दी गई है, ताकि घरेलू कंपनियां बाहर तेल बेचने के बजाय पहले देश की जरूरतों को पूरा करें।

क्यों पड़ी इस बड़े कदम की जरूरत?

फरवरी 2026 के अंत में जब अमेरिका और इजरायल की ईरान के साथ सैन्य भिड़ंत हुई, तो कच्चे तेल के दाम रातों-रात 50% से ज्यादा उछल गए। शिपिंग का खर्च बढ़ने से फर्टिलाइजर और गैस के दाम भी आसमान छूने लगे थे। अगर सरकार इम्‍पोर्ट ड्यूटी में यह ढील न देती, तो पैकेजिंग से लेकर दवाओं तक हर चीज महंगी हो जाती। सरकार के इस समयबद्ध फैसले से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को ऑक्सीजन मिली है, जिससे आम आदमी को युद्ध के इस दौर में भी महंगाई से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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