देश की राजनीतिक प्रक्रिया वैचारिक पतन को प्रदर्शित करती है: हामिद अंसारी

Edited By Updated: 31 Jan, 2026 05:58 PM

the country s political process reflects ideological decay hamid ansari

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का मानना है कि देश की राजनीतिक प्रक्रिया ''वैचारिक पतन'' को प्रदर्शित करती है, जहां ''हमने धनबल को हर तरह से चुनावी नतीजों को प्रभावित करने'' दिया है और उन्हें स्वतंत्र व निष्पक्ष बनाने में नाकाम रहे हैं।

नेशनल डेस्क: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का मानना है कि देश की राजनीतिक प्रक्रिया ''वैचारिक पतन'' को प्रदर्शित करती है, जहां ''हमने धनबल को हर तरह से चुनावी नतीजों को प्रभावित करने'' दिया है और उन्हें स्वतंत्र व निष्पक्ष बनाने में नाकाम रहे हैं। अपनी नयी पुस्तक 'आर्गुएबली कंटेंशियस: थॉट्स ऑन ए डिवाइडेड वर्ल्ड' में अंसारी ने लिखा है, ''हम चुनावी धांधली को खत्म करने में अभी तक सफल नहीं हुए हैं।

हमने धनबल को हर तरह से चुनावी नतीजों को प्रभावित करने दिया है और उन्हें स्वतंत्र व निष्पक्ष बनाने में नाकाम रहे हैं।'' उन्होंने लिखा, ''आज हमें यह मानना ​​होगा कि लोकतंत्र का गिलास आधा ही भरा है। हमने चुनावी लोकतंत्र को पूरी तरह से प्रतिनिधिक बनाए बिना, मशीनी तरीके से अपनाया है।'' पूर्व उपराष्ट्रपति ने दावा किया, ''हमारी चुनावी प्रक्रियाओं और तरीकों ने इन कमियों को कम करने के बजाय और बढ़ा दिया है।''

अंसारी, लगातार दो कार्यकाल (2007-2017) तक उपराष्ट्रपति रहे थे। उन्होंने पुस्तक में लिखा है, ''हमारी राजनीतिक प्रक्रिया वैचारिक पतन और संवैधानिक नैतिकता के घटते अनुपालन को दर्शाती है। हमारा समाज नैतिक व्यवस्था और सार्वजनिक अंतरात्मा के प्रति बढ़ती उपेक्षा को प्रदर्शित करता है।'' उनका कहना है कि इसी तरह, बहुसंख्यकवाद की बढ़ती प्रवृत्ति और विशिष्ट वर्गों को लक्षित करने के लिए इतिहास के हथियार के रूप में इस्तेमाल ने सामाजिक दरार को बढ़ाया है।

अंसारी का यह भी कहना है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों, जो भारत की आबादी का लगभग 20 प्रतिशत हैं, पर हाल के अध्ययनों से पता चला है कि उनके साथ भेदभाव उन धारणाओं से संबंधित है जो अगस्त 1947 में विभाजन के कारण उत्पन्न हुई सोच से संबंधित हैं। उनके अनुसार, राजनीति विज्ञानियों और समाजशास्त्रियों ने धर्मनिरपेक्षता की भारतीय धारणा पर काफी कुछ लिखा है।

अंसारी का मानना है कि एक धर्मनिरपेक्ष देश की आम तौर पर तीन स्वीकृत विशेषताएं होती हैं धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता, धर्मों के बीच समानता, और तटस्थता, ''लेकिन उनका कार्यान्वयन विरोधाभासी रहा है तथा इससे बड़ी विसंगतियां पैदा हुई हैं।'' राज्यसभा के पूर्व सभापति का यह भी मानना ​​है कि संसद ने विचार-विमर्श, जवाबदेही और निगरानी के साधन के रूप में अपनी प्रभावशीलता खो दी है।

रूपा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक, अंसारी के लेखन, व्याख्यान और भाषणों को एक सूत्र में पिरोती है ताकि यह उजागर किया जा सके कि कूटनीति, बहुलवाद और नीति दुनिया में भारत की जगह को आकार देने में कैसे साथ मिलकर काम करती हैं। पुस्तक तेजी से हो रहे बदलाव के युग में भारत की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक वास्तविकताओं की पड़ताल करती है।

Related Story

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!