क्या टुकड़ों में बंट जाएगा उत्तर प्रदेश? जानें पूर्वांचल और पश्चिम यूपी को अलग राज्य बनाने की पूरी प्रक्रिया

Edited By Updated: 22 Jan, 2026 02:04 PM

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देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में एक बार फिर "बंटवारे" की चर्चाएं तेज हो गई हैं। 80 लोकसभा सीटों और 75 जिलों वाले इस विशाल प्रदेश को छोटे राज्यों में विभाजित करने की मांग अब सियासी गलियारों से निकलकर जनभावनाओं तक पहुँच रही है।

नेशनल डेस्क: देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में एक बार फिर "बंटवारे" की चर्चाएं तेज हो गई हैं। 80 लोकसभा सीटों और 75 जिलों वाले इस विशाल प्रदेश को छोटे राज्यों में विभाजित करने की मांग अब सियासी गलियारों से निकलकर जनभावनाओं तक पहुँच रही है।

क्यों उठी अलग पूर्वांचल की मांग?

हाल के महीनों में पश्चिमी यूपी में भाजपा के कुछ नेताओं ने छोटे राज्य की जरूरत पर बयान दिए। अब अमेठी से पूर्वांचल राज्य की मांग तेज हो गई है। एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने साफ कहा कि जब तक पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक उसका समुचित विकास संभव नहीं है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिससे यह संकेत मिला कि यह मुद्दा केवल राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि आम लोगों की भावनाओं से भी जुड़ा है।

इसके पीछे मुख्य तर्क यह है कि पश्चिमी यूपी के मुकाबले पूर्वी हिस्सा आज भी विकास, शिक्षा और रोजगार में पीछे है। समर्थकों का मानना है कि छोटे राज्य से प्रशासनिक पकड़ मजबूत होगी और स्थानीय समस्याओं का समाधान तेजी से होगा।   

क्या यूपी का बंटवारा मुमकिन है? (संवैधानिक प्रक्रिया)

भारत के संविधान में किसी राज्य को बांटने की प्रक्रिया काफी स्पष्ट है। इसके लिए आपको अनुच्छेद 3 (Article 3) को समझना होगा:

  1. संसद का अधिकार: राज्य की सीमा बदलने या नया राज्य बनाने की अंतिम शक्ति केवल देश की संसद के पास है।

  2. राष्ट्रपति की भूमिका: राज्य बंटवारे का प्रस्ताव (Bill) पेश करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी है। राष्ट्रपति इस प्रस्ताव को संबंधित राज्य (जैसे- यूपी) की विधानसभा के पास भेजते हैं।

  3. विधानसभा की राय: यूपी विधानसभा इस पर चर्चा कर अपनी राय देगी। हालांकि, विधानसभा की राय मानना संसद के लिए अनिवार्य (Binding) नहीं है। अगर विधानसभा मना भी कर दे, तो भी संसद कानून पास कर सकती है।

  4. साधारण बहुमत: इस कानून को पास करने के लिए संसद में किसी विशेष बहुमत की जरूरत नहीं होती; इसे सामान्य वोटिंग (Simple Majority) से पारित किया जा सकता है।

इतिहास क्या कहता है?

यह पहली बार नहीं है जब यूपी के टुकड़े करने की बात हुई हो।

  • साल 2000: उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड बना था।

  • साल 2011: तत्कालीन मायावती सरकार ने यूपी को 4 हिस्सों (पूर्वांचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड और अवध प्रदेश) में बांटने का प्रस्ताव विधानसभा से पास कराया था, लेकिन केंद्र में बात आगे नहीं बढ़ी।

 

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