Air Pollution: दिल्ली की खराब हवा के पीछे बड़ा कारण बाहर से आने वाला प्रदूषण, रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Edited By Updated: 04 Jan, 2026 02:20 PM

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देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। दिवाली के बाद से लेकर जनवरी तक लोगों को जहरीली हवा में सांस लेनी पड़ रही है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार बना हुआ है।

नेशनल डेस्क: देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। दिवाली के बाद से लेकर जनवरी तक लोगों को जहरीली हवा में सांस लेनी पड़ रही है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार बना हुआ है। इसी बीच एक नई स्टडी सामने आई है, जिसने दिल्ली के प्रदूषण को लेकर अहम जानकारी दी है।

65 फीसदी प्रदूषण बाहर से आ रहा है
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में दिल्ली के कुल वायु प्रदूषण का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा एनसीआर और पड़ोसी राज्यों से आया है। रिपोर्ट बताती है कि राजधानी की हवा को सबसे ज्यादा नुकसान आसपास के जिलों और राज्यों से आने वाले प्रदूषकों ने पहुंचाया। वहीं, दिल्ली के अपने स्थानीय स्रोतों से केवल 35 प्रतिशत प्रदूषण पैदा हुआ।


वाहनों से निकलने वाला धुआं सबसे बड़ा स्थानीय कारण
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दिल्ली में स्थानीय स्तर पर PM2.5 प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत वाहन हैं। गाड़ियों से निकलने वाला धुआं कुल स्थानीय PM2.5 का लगभग आधा हिस्सा है। यह प्रदूषण इंडस्ट्री, निर्माण कार्य और कचरा जलाने जैसे अन्य स्रोतों से भी ज्यादा पाया गया।


पराली जलाने का असर पहले से कम
CREA की स्टडी में यह भी बताया गया है कि 2025 में पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण पहले के मुकाबले काफी कम रहा। 15 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच, जब पराली जलाने का समय चरम पर होता है, उस दौरान PM2.5 प्रदूषण में औसतन केवल 4.9 प्रतिशत योगदान पराली का रहा। जबकि 2024 में इसी अवधि में यह आंकड़ा 15 प्रतिशत से अधिक था। हालांकि कुछ खास दिनों में इसका असर ज्यादा देखा गया। 12 नवंबर 2025 को पराली जलाने से 22.47 प्रतिशत तक प्रदूषण दर्ज किया गया। इसके बाद 15 नवंबर को 16.48 प्रतिशत और 17 नवंबर को 16.14 प्रतिशत योगदान रहा। फिर भी ये आंकड़े 2024 की तुलना में काफी कम हैं, जब कई दिनों में पराली से होने वाला प्रदूषण 35 से 37 प्रतिशत तक पहुंच गया था।


PM2.5 और PM10 में भी सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दिल्ली का सालाना औसत PM2.5 स्तर 96 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा, जो 2024 के 105 माइक्रोग्राम से कम है। यानी करीब 8.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह PM10 के स्तर में भी सुधार देखा गया। 2025 में इसका सालाना औसत 197 माइक्रोग्राम रहा, जबकि 2024 में यह 211 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था।


समाधान सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं
CREA के एनालिस्ट मनोज कुमार एन के अनुसार, दिल्ली की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उत्तर और उत्तर-पश्चिम से चलने वाली हवाएं एनसीआर और पड़ोसी राज्यों का प्रदूषण राजधानी तक ले आती हैं। यही वजह है कि दिल्ली की हवा पर बाहरी इलाकों का असर ज्यादा पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर प्रदूषण पर काबू पाना है तो सिर्फ दिल्ली में कदम उठाना काफी नहीं होगा। इसके लिए पूरे एनसीआर और आसपास के राज्यों को मिलकर एक साझा रणनीति पर काम करना होगा, तभी राजधानी की हवा को साफ किया जा सकता है।

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