Edited By Mehak,Updated: 06 Mar, 2026 05:06 PM

साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा और यह 13 अगस्त की सुबह तक जारी रहेगा। यह कंकणाकृति (Annular) सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य का अधिकांश हिस्सा ढक लेगा और आसमान में चमकती हुई अंगूठी जैसी “Ring of Fire” दिखाई देगी। यह ग्रहण भारत...
नेशनल डेस्क : साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से काफी खास माना जा रहा है। इस साल अब तक एक सूर्य ग्रहण और एक चंद्र ग्रहण हो चुका है। पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को अमावस्या के दिन लगा था, जबकि चंद्र ग्रहण 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के मौके पर देखा गया। अब खगोलविदों और ज्योतिष में रुचि रखने वाले लोगों की नजर साल के दूसरे सूर्य ग्रहण पर टिकी हुई है। यह ग्रहण इसलिए भी खास है क्योंकि इसके दौरान सूर्य का बड़ा हिस्सा चंद्रमा द्वारा ढक लिया जाएगा, जिससे कुछ स्थानों पर दिन के समय भी अंधेरे जैसा माहौल बन सकता है।
सूर्य ग्रहण क्या होता है?
सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है जो तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूरी तरह से ढक देता है। जब सूर्य का अधिकांश भाग चंद्रमा से ढक जाता है, तो पृथ्वी के कुछ हिस्सों में रोशनी कम हो जाती है और कुछ समय के लिए वातावरण में अंधेरा जैसा महसूस हो सकता है। वैज्ञानिकों के लिए यह घटना काफी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसके माध्यम से सूर्य और अंतरिक्ष से जुड़ी कई जानकारियों का अध्ययन किया जाता है।
कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण?
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा। खगोलीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और अगले दिन यानी 13 अगस्त 2026 की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक चलेगा। यह ग्रहण काफी लंबे समय तक रहने वाला है, इसलिए खगोल विज्ञान के नजरिए से इसे एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।
कंकणाकृति सूर्य ग्रहण क्या होता है?
यह ग्रहण कंकणाकृति (Annular Solar Eclipse) होगा। इस प्रकार के सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के बीच में आ जाता है, लेकिन वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। इस वजह से सूर्य का बाहरी किनारा चमकता हुआ दिखाई देता है और आसमान में एक चमकती हुई अंगूठी या रिंग जैसा दृश्य बनता है। यही कारण है कि इसे कई बार ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है।
क्या भारत में दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?
यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसकी वजह यह है कि जब ग्रहण लगेगा, उस समय भारत में रात का समय होगा और सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब किसी स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देता, तो वहां सूतक काल भी मान्य नहीं होता। इसलिए इस ग्रहण के दौरान भारत में मंदिरों के दरवाजे बंद नहीं होंगे और पूजा-पाठ या दैनिक कार्य सामान्य रूप से चलते रहेंगे।
किन देशों में दिखेगा यह सूर्य ग्रहण?
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से पृथ्वी के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में देखा जा सकेगा। जिन क्षेत्रों में इसका प्रभाव ज्यादा होगा, उनमें शामिल हैं:
- आर्कटिक क्षेत्र
- ग्रीनलैंड
- आइसलैंड
- अटलांटिक महासागर का बड़ा हिस्सा
- उत्तरी स्पेन
इसके अलावा यूरोप के कई देशों में यह ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा। इनमें प्रमुख रूप से फ्रांस, ब्रिटेन और इटली जैसे देश शामिल हैं।
वैज्ञानिकों के लिए क्यों है खास अवसर?
सूर्य ग्रहण को खगोल विज्ञान के लिए एक खास अवसर माना जाता है। इस दौरान वैज्ञानिक सूर्य के बाहरी हिस्से, उसकी ऊर्जा और वातावरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों का अध्ययन करते हैं। साथ ही ग्रहण के समय पृथ्वी के वातावरण और तापमान में होने वाले बदलावों पर भी शोध किया जाता है।