उद्धव ठाकरे एक बड़ी गलती के कारण हार गए BMC चुनाव, जिसका BJP को मिला सीधा लाभ

Edited By Updated: 17 Jan, 2026 12:02 PM

uddhav thackeray lost the bmc elections 2026 because of this one big mistake

BMC चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने 65 सीटें जीतीं, लेकिन बीजेपी–शिंदे सेना गठबंधन ने 118 सीटों के साथ बहुमत हासिल कर लिया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उद्धव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया होता, तो वोट शेयर जोड़कर कम से कम 104 सीटें हासिल...

नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र की राजनीति में BMC (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव नतीजों के बाद बड़ा सवाल उठ रहा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने चुनाव में 65 सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई, लेकिन बीजेपी–शिंदे सेना गठबंधन ने 118 सीटों के साथ बहुमत हासिल कर लिया। ऐसे में यह चर्चा तेज है कि अगर उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया होता, तो क्या BMC की सत्ता उनके हाथ में रह सकती थी।

आंकड़े क्या कहते हैं

चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो यह संभावना मजबूत दिखती है। कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ते हुए 24 सीटें जीतीं, लेकिन विपक्षी दलों के अलग-अलग लड़ने से वोट बंटवारा हुआ। इसका सीधा फायदा महायुति (बीजेपी–शिंदे सेना) को मिला। अगर शिवसेना (UBT) और कांग्रेस साथ होते, तो दोनों के वोट शेयर जुड़कर करीब 32 प्रतिशत तक पहुंच सकते थे।

यह भी पढ़ें - राजनीति में हलचल! BJP के इस वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस में वापसी का किया ऐलान, बताई ये अहम वजह

वोट बंटवारे से हुआ नुकसान

कांग्रेस ने 151 वार्डों में उम्मीदवार उतारे थे। उनका मुख्य वोट बैंक मुस्लिम और दलित बहुल इलाकों में रहा, जहां शिवसेना (UBT) भी मजबूत स्थिति में थी। कई वार्डों में दोनों के अलग-अलग उम्मीदवारों के कारण वोट बंट गए। उदाहरण के तौर पर धारावी जैसे वार्डों में कांग्रेस को जीत मिली, लेकिन गठबंधन की स्थिति में शिवसेना (UBT) का उम्मीदवार और मजबूत हो सकता था।

अगर गठबंधन होता तो क्या बदलता?

विश्लेषण के मुताबिक कांग्रेस के करीब 2.4 लाख वोट ऐसे थे, जो गठबंधन की स्थिति में शिवसेना (UBT) के उम्मीदवारों को मिल सकते थे। इससे 20 से 25 प्रतिशत वार्डों में नतीजे बदलने की संभावना थी। अनुमान है कि इससे शिवसेना (UBT)–कांग्रेस गठबंधन को कम से कम 15 अतिरिक्त सीटें मिल सकती थीं। एनसीपी (एसपी) को जोड़ दिया जाए, तो आंकड़ा बहुमत के करीब पहुंच सकता था।

महायुति की बढ़त भी होती कमजोर

बीजेपी का वोट शेयर मजबूत जरूर रहा, लेकिन कई वार्डों में जीत का अंतर 5 प्रतिशत से भी कम था। अगर विपक्ष एकजुट होता, तो ऐसे 10 से 15 वार्डों में महायुति को हार का सामना करना पड़ सकता था। दादर और शिवाजी पार्क जैसे इलाकों में शिवसेना (UBT) की पकड़ मजबूत रही, लेकिन कांग्रेस के अलग लड़ने से नुकसान हुआ।

यह भी पढ़ें - लिवर विशेषज्ञ की बड़ी चेतावनी, खाली पेट सुबह की पहली ये चीज सेहत के लिए है बेहद खतरनाक

उद्धव ठाकरे की राजनीति पर असर

इन नतीजों से साफ है कि उद्धव ठाकरे ने मराठी वोट बैंक पर अपनी पकड़ बनाए रखी। शिंदे गुट की शिवसेना सिर्फ 27 सीटें जीत पाई, जबकि UBT ने 65 सीटें हासिल कीं। इसके बावजूद बीएमसी हाथ से निकलने के साथ मुंबई में 25 साल पुराना सत्ता का दौर खत्म हो गया। माना जा रहा है कि अगर विपक्षी एकजुटता बनी रहती, तो तस्वीर अलग हो सकती थी। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले चुनावों में महाविकास अघाड़ी (MVA) फिर से एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी, या यह बिखराव विपक्ष को आगे भी नुकसान पहुंचाता रहेगा।

Related Story

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!