Edited By Radhika,Updated: 16 Jan, 2026 06:22 PM

आजकल के दौर में कैश पेमेंट की जगह UPI ने पेमेंट को आसान बना दिया है। डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुका UPI क्या अब Paid होने जा रहा है? बजट 2026 के करीब आते ही डिजिटल पेमेंट कंपनियों और बैंकों ने सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की है। उनका तर्क है कि...
नेशनल डेस्क: आजकल के दौर में कैश पेमेंट की जगह UPI ने पेमेंट को आसान बना दिया है। डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुका UPI क्या अब Paid होने जा रहा है? बजट 2026 के करीब आते ही डिजिटल पेमेंट कंपनियों और बैंकों ने सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की है। उनका तर्क है कि बिना किसी आय के इस विशाल नेटवर्क को चलाना अब आर्थिक रूप से 'असंभव' होता जा रहा है।
इंसेंटिव में भारी कटौती ने बढ़ाई चिंता
PhonePe और अन्य फिनटेक दिग्गजों का कहना है कि सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि लगातार घट रही है। जहाँ वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ने ₹3,900 करोड़ का इंसेंटिव दिया था, वहीं 2025-26 के मौजूदा बजट अनुमानों में यह गिरकर मात्र ₹427 करोड़ रह गया है। कंपनियों के मुताबिक, सर्वर, साइबर सुरक्षा और ग्राहकों को जोड़ने का सालाना खर्च ₹10,000 करोड़ से अधिक है।

क्या है कंपनियों का नया प्रस्ताव
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने सुझाव दिया है कि आम जनता और छोटे दुकानदारों के लिए UPI को 'फ्री' रखा जाए, लेकिन ₹10 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले बड़े मर्चेंट्स पर 0.25% से 0.30% का 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) लागू किया जाए। उनका दावा है कि इससे सिस्टम टिकाऊ बनेगा और आम आदमी की जेब पर असर नहीं पड़ेगा।
आरबीआई गवर्नर का रुख
RBI के अधिकारियों ने भी दबी जुबान में स्वीकार किया है कि 'पब्लिक गुड' होने के बावजूद इसकी परिचालन लागत किसी न किसी को तो उठानी ही होगी। यदि सरकार सब्सिडी नहीं बढ़ाती है, तो भविष्य में बड़े ट्रांजैक्शंस पर शुल्क लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।