Edited By Mehak,Updated: 21 Jan, 2026 06:26 PM

सरकार के ताजा लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार भारत में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों में बेरोजगारी दर करीब 5 प्रतिशत है। रिपोर्ट बताती है कि शहरों में बेरोजगारी की समस्या गांवों की तुलना में ज्यादा गंभीर है, जहां पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरियां कम मिल पा रही...
नेशनल डेस्क : भारत में रोजगार और बेरोजगारी आम लोगों के लिए हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है। हाल ही में सरकार की ओर से जारी लेटेस्ट लेबर फोर्स सर्वे ने देश में नौकरी की स्थिति की एक साफ तस्वीर पेश की है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कितने लोग काम कर रहे हैं, कितने नौकरी की तलाश में हैं और शहरों व गांवों में हालात कैसे अलग हैं।
सर्वे के मुताबिक, 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में बेरोजगारी दर करीब 5 प्रतिशत दर्ज की गई है। प्रतिशत भले ही कम लगे, लेकिन देश की बड़ी आबादी को देखते हुए यह आंकड़ा लाखों लोगों से जुड़ा है। बेरोजगारी का असर सिर्फ आमदनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं पर भी पड़ता है।
शहरों में रोजगार की स्थिति
शहरी इलाकों में बेरोजगारी की समस्या ज्यादा गंभीर नजर आती है। यहां पढ़े-लिखे युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसी अनुपात में नौकरियां नहीं बन पा रही हैं। निजी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी है और कई युवा डिग्री व प्रोफेशनल कोर्स करने के बाद भी लंबे समय तक नौकरी की तलाश में रहते हैं। महंगाई और किराए का बोझ भी बिना नौकरी के शहरों में जीवन को मुश्किल बना देता है।
गांवों में रोजगार की हालत
ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर शहरों से थोड़ी कम है, लेकिन चुनौतियां यहां भी मौजूद हैं। खेती, मजदूरी और छोटे कामों से लोगों को किसी न किसी तरह का रोजगार मिल जाता है। मनरेगा जैसी योजनाएं भी सहारा देती हैं। हालांकि, यहां काम अक्सर अस्थायी होता है और आमदनी सीमित रहती है, जिस कारण कई लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं।
लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन की तस्वीर
लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट से पता चलता है कि कितने लोग काम कर रहे हैं या काम की तलाश में हैं। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, देश की आधी से थोड़ी ज्यादा आबादी रोजगार से जुड़ी है। पुरुषों की भागीदारी महिलाओं से कहीं अधिक है, जबकि महिलाओं का बड़ी संख्या में कार्यबल से बाहर रहना अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।
युवाओं पर सबसे ज्यादा असर
बेरोजगारी का सबसे ज्यादा दबाव युवाओं पर पड़ता है। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी न मिलना मानसिक तनाव बढ़ाता है। खासकर शहरों में सीमित अवसर, अनुभव की मांग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण युवा लंबे समय तक इंतजार करने को मजबूर हैं। यही वजह है कि रोजगार आज भी देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है।