अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान: सोशल मीडिया कंपनियां कंटेंट क्रिएटर्स से साझा करें मुनाफा

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 01:09 PM

vaishnaw calls for fair pay for digital content creators

नई दिल्ली में एक संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ किया कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी कमाई का एक उचित हिस्सा उन लोगों के साथ साझा करना चाहिए जो उनके प्लेटफॉर्म के लिए कंटेंट तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे वे पत्रकार हों,...

नेशनल डेस्क: नई दिल्ली में एक संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ किया कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी कमाई का एक उचित हिस्सा उन लोगों के साथ साझा करना चाहिए जो उनके प्लेटफॉर्म के लिए कंटेंट तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे वे पत्रकार हों, इन्फ्लुएंसर्स हों या शोधकर्ता, सभी को उनके काम का वाजिब मेहनताना मिलना जरूरी है।

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राजस्व बंटवारे में निष्पक्षता की मांग
अश्विनी वैष्णव ने तर्क दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म उन सूचनाओं और वीडियो से भारी लाभ कमाते हैं जो विभिन्न श्रेणियों के रचनाकारों द्वारा अपलोड किए जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दूरदराज के इलाकों में बैठे क्रिएटर्स, पारंपरिक मीडिया हाउस, समाचार पेशेवर, प्रोफेसर और शिक्षाविदों को उनके द्वारा साझा किए गए शोध और काम के बदले राजस्व का उचित हिस्सा मिलना चाहिए। मंत्री के अनुसार, राजस्व वितरण में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने से भारत की डिजिटल कंटेंट इकोनॉमी को नई ताकत मिलेगी।

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डीपफेक और एआई कंटेंट पर नकेल
राजस्व के अलावा, सरकार डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी सख्त कदम उठा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आईटी नियमों (2021) में नए संशोधनों का प्रस्ताव दिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य एआई-जनित गलत सूचनाओं और डीपफेक को रोकना है।  फेसबुक, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे बड़े प्लेटफॉर्म (जिनके भारत में 50 लाख से अधिक यूजर्स हैं) को एआई द्वारा तैयार की गई सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना होगा। एआई कंटेंट में स्थायी मेटाडेटा होना चाहिए जिसे हटाया या बदला न जा सके। वीडियो या तस्वीरों में कम से कम 10% हिस्से पर एआई पहचान का चिन्ह होना भी जरुरी है।

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