Edited By Parveen Kumar,Updated: 03 Jan, 2026 11:56 PM

राष्ट्रीय राजधानी में आने वाले दिनों में मध्यम से घना कोहरा छाए रहने की आशंका है, जिसके मद्देनजर मौसम विभाग ने रविवार के लिए ‘येलो अलर्ट' जारी किया है। इस बीच, दिल्ली की वायु गुणवत्ता शनिवार को ‘खराब' श्रेणी में दर्ज की गई, जहां 24 घंटे का औसत वायु...
नेशनल डेस्क: राष्ट्रीय राजधानी में आने वाले दिनों में मध्यम से घना कोहरा छाए रहने की आशंका है, जिसके मद्देनजर मौसम विभाग ने रविवार के लिए ‘येलो अलर्ट' जारी किया है। इस बीच, दिल्ली की वायु गुणवत्ता शनिवार को ‘खराब' श्रेणी में दर्ज की गई, जहां 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 267 रहा। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दिल्ली में अधिकतम तापमान 17.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री कम रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 8.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो इस मौसम के औसत से 1.2 डिग्री अधिक है। अधिकतम तापमान के स्टेशनवार आंकड़ों से पता चला कि पालम में 15.8 डिग्री सेल्सियस, लोधी रोड में 17.6 डिग्री सेल्सियस, रिज में 16.3 डिग्री सेल्सियस और आयानगर में 17.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
इस बीच, सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 8.1 डिग्री सेल्सियस, पालम में 7.9 डिग्री सेल्सियस, लोधी रोड में 8 डिग्री सेल्सियस, रिज में 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि आयानगर में तापमान सबसे कम 6.9 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने कहा है कि चार जनवरी से सात जनवरी के बीच शहर के कुछ इलाकों में शीत लहर की स्थिति बन सकती है। सुबह के समय दृश्यता कम रही।
आईएमडी के अनुसार, सफदरजंग में करीब नौ बजे दृश्यता घटकर 800 मीटर रह गई, जो बाद में बढ़कर 1,200 मीटर हो गई। इस बीच, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 267 दर्ज किया गया, जो ‘खराब' श्रेणी में आता है। राजधानी के 14 निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई ‘खराब', 17 पर ‘बहुत खराब' और छह पर ‘मध्यम' श्रेणी में रहा। जहांगीरपुरी में एक्यूआई 340 के साथ सबसे खराब दर्ज किया गया।
वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, रविवार से छह जनवरी तक एक्यूआई के ‘बहुत खराब' श्रेणी में बने रहने की आशंका है। निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) के मुताबिक, दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों का योगदान 10.7 प्रतिशत, परिधीय उद्योगों का 10.5 प्रतिशत और निर्माण गतिविधियों का 1.6 प्रतिशत रहा। एनसीआर जिलों में झज्जर का योगदान सबसे अधिक 16.7 प्रतिशत रहा।